डेस्क : ईरान संकट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी कूटनीतिक वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच करीब 14 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बाद भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई।
वार्ता का उद्देश्य जारी तनाव को कम करना, युद्धविराम को स्थायी रूप देना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना था। हालांकि, बातचीत के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहे, जिसके चलते कोई साझा समाधान सामने नहीं आ सका।
अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त प्रतिबंधों और भविष्य में परमाणु हथियार न बनाने की स्पष्ट गारंटी की मांग रखी। दूसरी ओर, ईरान ने इन मांगों को अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया। ईरान की ओर से आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण और युद्ध से जुड़े मुआवजे जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए।
वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने इसे “गंभीर और विस्तृत बातचीत” बताते हुए कहा कि अमेरिका ने अपना अंतिम प्रस्ताव दे दिया है और अब ईरान के रुख का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, ईरान ने स्पष्ट किया कि मतभेद अभी भी कायम हैं और आगे की बातचीत की आवश्यकता बनी हुई है।
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था। ताजा गतिरोध ने इस युद्धविराम की स्थिरता को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंध जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति बनना फिलहाल आसान नहीं दिख रहा, जिससे इस संकट के जल्द समाधान की संभावना कम नजर आती है।













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