डेस्क:केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया। अब इस पर अगले आठ घंटे तक चर्चा होने की उम्मीद है। इसे लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है। बिल पेश करते हुए रिजिजू ने कहा कि पूर्ववर्ती UPA सरकार ने वक्फ कानून में बदलावों के जरिए इसे अन्य कानूनों से ऊपर कर दिया था, इसलिए इसमें नये संशोधनों की जरूरत पड़ी। रिजिजू ने सदन में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि आपने उन मुद्दों पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की, जो वक्फ विधेयक का हिस्सा नहीं हैं। बता दें कि एनडीए के सहयोगी दल जैसे जेडीयू, टीडीपी और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी सरकार के समर्थन का ऐलान किया है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ इस बिल का कड़ा विरोध करने के लिए तैयार है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इसे संविधान के खिलाफ और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी बिल के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन की अपील की है। लोकसभा में संख्याबल के हिसाब से एनडीए की स्थिति मजबूत है, जिसके पास 293 सांसद हैं, जबकि बिल पास करने के लिए 272 वोटों की जरूरत है।
संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “मुतवल्ली गैर-इस्लामिक नहीं हो सकता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ एक धार्मिक संस्था है, लेकिन वक्फ बोर्ड नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चैरिटी कमिश्नर का काम ट्रस्ट को चलाना नहीं, बल्कि उसकी निगरानी करना होता है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि पुरानी मिलीभगत जारी रहे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए कहा, वक्फ से जुड़े धार्मिक कार्यों में गैर-मुस्लिमों को शामिल नहीं किया जा रहा है। लेकिन, कुछ लोग इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर अपने वोटबैंक को सुरक्षित रखने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य केवल यह सुनिश्चित करने के लिए होते हैं कि काम सही तरीके से हो रहा है या नहीं।
गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ के मतलब और उसके इतिहास को समझाते हुए कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका जिक्र कुछ हदीसों में मिलता है। उन्होंने बताया कि वक्फ का मतलब किसी संपत्ति को अल्लाह के नाम पर दान करना होता है और इसका प्रचलन इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर के समय शुरू हुआ था।
वक्फ बिल पर बहस के दौरान संसद में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “2013 में रातों-रात तुष्टिकरण करने के लिए वक्फ को एक्स्ट्रीम बना दिया। इसके कारण दिल्ली लुटियंस की 123 सरकारी संपत्ति वक्फ को देने का काम किया। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने उत्तरी रेलवे की भूमि वक्फ के नाम घोषित कर दी। हिमाचल प्रदेश में वक्फ की संपत्ति बताकर उस पर अवैध मस्जिद बनाने का काम किया गया। तमिलनाडु में 1500 साल पुराने मंदिर की जमीन वक्फ को दे दिया गया।”
संसद में वक्फ बिल पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी पूरी मजबूती के साथ इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मैं अपने मंत्री साथी द्वारा पेश किए गए बिल का समर्थन करता हूं। मैं दोपहर 12 बजे से चल रही चर्चा को ध्यान से सुन रहा हूं… मुझे लगता है कि कई सदस्यों के मन में या तो वास्तविक रूप से या फिर राजनीतिक कारणों से कई गलतफहमियां हैं।”