डेस्क:बीते कुछ वर्षों में अनाज, सब्जी और दालों जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खासकर, मंडी और खुदरा कीमतों में भारी अंतर के कारण उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की फरवरी रिपोर्ट में सप्लाई चेन की मोबिलिटी पर आधारित एक अध्ययन में यह सामने आया है कि गेहूं और आटे की कीमतों के बीच अंतर बीते 14 वर्षों में सबसे अधिक बढ़ा है।
मंडी और खुदरा कीमतों में अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 में गेहूं की कीमतों और बाजार में बिकने वाले आटे की खुदरा कीमतों में महज 5 रुपये का अंतर था, जो अब 2024 तक बढ़कर 20 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह, अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जो आम उपभोक्ताओं को परेशान कर रहा है।
जमाखोरी का प्रभाव
अचानक बढ़ी हुई कीमतों के पीछे जमाखोरी को एक बड़ा कारण माना गया है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि कुछ खाद्य वस्तुओं के मामलों में थोक मंडी और खुदरा कीमतों के बीच अंतर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है और आम आदमी पर इसका बोझ पड़ रहा है।
किसान और उपभोक्ता की हिस्सेदारी
अध्यान बताता है कि चुनिंदा फसलों में उपभोक्ता कीमतों में किसानों की हिस्सेदारी 40 से 67 प्रतिशत तक होती है। गेहूं उत्पादकों की हिस्सेदारी इस मामले में सबसे अधिक है। यह भी पाया गया कि अगर नीतिगत हस्तक्षेप किए जाएं, तो किसानों और उपभोक्ताओं को फायदा हो सकता है। बाजार से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने और कोल्ड स्टोरेज क्षमता बढ़ाने से सप्लाई चेन की अकुशलता को दूर किया जा सकता है, जिससे कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
कृषि नीति में सुधार की आवश्यकता
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि अगर किसानों को सही दाम मिलें और सप्लाई चेन की समस्याएं हल हों, तो महंगाई को काबू में लाया जा सकता है। इस तरह, किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिल सकता है।
थोक और खुदरा कीमतों का अंतर:
फसल | वर्ष | थोक भाव (रुपये) | खुदरा भाव (रुपये) |
---|---|---|---|
गेहूं | 2021 | 13 | 18 (आटा) |
गेहूं | 2024 | 40 | 60 (आटा) |
चना | 2011 | 27 | 35 (दाल) |
चना | 2024 | 30 | 35 (दाल) |
आलू | 2021 | 5 | 9 |
आलू | 2024 | 35 | 45 |
टमाटर | 2011 | 6 | 10 |
टमाटर | 2024 | 20 | 35 |
प्याज | 2011 | 8 | 12 |
प्याज | 2024 | 30 | 40 |
महंगाई के कारण
अध्ययन के अनुसार, खुदरा व्यापारियों ने माना कि जमाखोरी और सप्लाई चेन में बाधा के कारण कीमतों में वृद्धि हो रही है। वहीं, मौसमीय कारण, सोने की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय सप्लाई और वैश्विक तनाव भी महंगाई में योगदान दे रहे हैं।
महंगाई के प्रमुख कारण:
- जमाखोरी: 80%
- मौसमी कारण: 40%
- सोने की कीमतें: 18%
- अंतरराष्ट्रीय सप्लाई: 17%
- वैश्विक तनाव: 7%
थोक और खुदरा कीमतों में अंतर:
- थोक मूल्य वह मूल्य है, जो मंडी या किसान से सीधे खरीदी जाने वाली वस्तुओं के लिए निर्धारित होता है।
- खुदरा मूल्य वह मूल्य है, जिस पर व्यापारी आम उपभोक्ता को सामान बेचते हैं। इसमें थोक व्यापारी का कमीशन, परिवहन खर्च, भंडारण खर्च और अन्य खर्च जुड़ते हैं। कई बार खुदरा मूल्य इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि व्यापारियों द्वारा खाद्य वस्तुओं का भंडारण कर लिया जाता है, जिसे जमाखोरी कहते हैं।
इस अध्ययन से यह साफ है कि सरकार और नीतियों के बदलाव से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है, जिससे आम जनता और किसानों को राहत मिल सकेगी।