सावन माह में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सावन माह भगवान शिव को अतिप्रिय है। हर महीने की कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है। सावन माह में पड़ने वाले प्रदोष व्रत अत्यंत खास माने गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि व संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। जानें सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है।
सावन के पहले प्रदोष व्रत की तारीख: हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 जुलाई को सुबह 07:04 मिनट पर प्रारंभ होगी और 23 जुलाई को सुबह 04:38 मिनट पर त्रयोदशी तिथि का समापन होगा। उदया तिथि में प्रदोष व्रत 22 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन मंगलवार होने के कारण भौम प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है।
द्विपुष्कर योग का बन रहा शुभ संयोग: ज्योतिष शास्त्र में द्विपुष्कर योग को शुभ फल प्रदान करने वाला बताया गया है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का दो गुना फल प्राप्त होता है। इस दिन द्विपुष्कर योग सुबह 05 बजकर 37 मिनट से सुबह 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगा।
भौम प्रदोष व्रत पर शिव पूजन मुहूर्त 2025: शिव पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:14 बजे से सुबह 04:56 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक रहेगा। पूजन का विजय मुहूर्त दोपहर 02:44 बजे से दोपहर 03:39 बजे तक रहेगा। प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजन का प्रदोष काल मुहूर्त शाम 07 बजकर 19 मिनट से रात 09 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
भौम प्रदोष व्रत का फल: मान्यता है कि भौम प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख-शांति व खुशहाली आती है। भगवान शिव की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। जातक की जन्मकुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत होती है।













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