डेस्क:सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ाने के लिए प्रयास करने को कहा है। गुरुवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से आग्रह किया कि वह 2020 वाली इलेक्ट्रिक वाहनों की नीति को तकनीकी और बाजार में आए बदलावों के हिसाब से बदल लेना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि किसी नई नीति के तहत महानगर में इसे लेकर एक पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया जा सकता है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सरकार की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना के तहत बेहतर काम किया है। लेकिन अब इस नीति को भविष्य और वर्तमान की वास्तविकताओं के हिसाब से बदलने की जरूरत है। पीठ ने कहा, “सरकार को अपनी इस नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें कई बदलाव हुए हैं और इसे किसी महानगर से शुरू होने वाली एक पायलट परियोजना के ज़रिए लागू किया जा सकता है।
केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमण ने अदालत को सूचित किया कि 13 केंद्रीय मंत्रालयों वाला एक अंतर-मंत्रालयी समूह पहले से ही ईवी अपनाने की व्यवहार्यता और विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि ईवी पर बनी हुई नीति पर जल्दी ही निर्णय लिया जाएगा।
जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले कोलेकर कहा कि अब बाजार में उच्च स्तरीय इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध हैं। इसलिए सरकार इस श्रेणी के बड़े पेट्रोल और डीजल वाहनों को बंद करने के बारे में चरणबद्ध तरीके से विचार करना चाहिए। बेंच ने कहा, “हम विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन विचार यह है कि अब इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में बाजार में बहुत अच्छी कारें आ गई हैं। बहुत उच्च-स्तरीय वीआईपी अभी भी इन डीजल पेट्रोल वाली कारों का उपयोग कर रहे हैं। जरा सोचिए कि इन कारों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाया जाए ताकि आम आदमी पर इसका कोई असर न पड़े।” इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विचार करने के लिए तैयार है। सरकार इसके पक्ष में है।













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