डेस्क : नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट पर अदालत द्वारा संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की है।
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने कहा कि नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी, लेकिन भाजपा सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग जैसे निराधार आरोपों से जोड़कर बदनाम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में कोई ठोस आधार नहीं है और इसका उद्देश्य केवल गांधी परिवार और कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
खरगे ने यह भी दावा किया कि मोदी सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं पर दबाव बना रही है, जिससे कई नेता भाजपा में शामिल होने को मजबूर हुए और कुछ राज्यों में इसी के जरिए सरकारें बनाई गईं।
सिंघवी बोले— आरोप पूरी तरह आधारहीन
कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला राजनीतिक द्वेष और लापरवाही का उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग के किसी भी मामले में धन या अचल संपत्ति के स्थानांतरण का होना आवश्यक है, जबकि इस प्रकरण में न तो धन का लेन-देन हुआ और न ही किसी संपत्ति का ट्रांसफर। आज भी सभी अचल संपत्तियां एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के पास ही हैं।
सिंघवी ने बताया कि एजेएल को ऋण-मुक्त करने के उद्देश्य से ‘यंग इंडियन’ नामक एक नई कंपनी बनाई गई थी, जिसके जरिए ऋण का हस्तांतरण किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया देश की कई कंपनियों में सामान्य रूप से अपनाई जाती है, लेकिन इसी को मनी लॉन्ड्रिंग बताना पूरी तरह हास्यास्पद है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ‘यंग इंडियन’ एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसके निदेशकों को न वेतन मिलता है, न लाभांश और न ही कोई भत्ता।
2014 की शिकायत से शुरू हुआ मामला
सिंघवी के अनुसार यह मामला वर्ष 2014 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत से शुरू हुआ था, जिस पर समन जारी किया गया। उन्होंने बताया कि सीबीआई और ईडी दोनों ने अपनी फाइलों में यह दर्ज किया था कि इस प्रकरण में कोई ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ नहीं बनता, यही कारण रहा कि सात वर्षों तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बावजूद जून 2021 में ईडी द्वारा ईसीआईआर दर्ज किया जाना राजनीतिक दुर्भावना का स्पष्ट संकेत है।
उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल अधिकृत जांच एजेंसी ही एफआईआर दर्ज कर सकती थी, जो इस मामले में नहीं की गई। इसी आधार पर कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।
एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
सिंघवी ने दावा किया कि अदालत के आदेश से यह साफ हो गया है कि यह मामला बिना किसी सबूत और कानूनी आधार के बदले की भावना से दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि ईडी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से करीब 90 घंटे पूछताछ की, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया। इस दौरान कई संपत्तियों को कुर्क और फ्रीज किया गया तथा उनसे होने वाली आय भी रोक दी गई।
वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी सरकार द्वारा कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ की जा रही बदले की राजनीति को देश की सड़कों पर उजागर करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई को जमीनी स्तर तक ले जाएगी और जनता को बताएगी कि किस तरह केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को निशाना बनाने के लिए कर रही है।













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