भारतीय ज्योतिष और रत्न-विज्ञान में मोती (पर्ल) को चंद्रमा का प्रतिनिधि रत्न माना गया है। चंद्रमा मन, भावनाओं, मातृत्व, शांति और मानसिक संतुलन का कारक ग्रह है। मोती धारण करने का उद्देश्य प्रायः मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और चंद्र दोषों से मुक्ति माना जाता है। लेकिन बिना सही जानकारी और विचार के मोती पहनना लाभ के बजाय हानि भी पहुँचा सकता है। इसलिए मोती धारण करने से पहले निम्नलिखित बातों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए।
कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अवश्य देखें
मोती धारण करने से पहले यह जानना बेहद आवश्यक है कि आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा किस भाव में है, किस राशि में है और शुभ है या अशुभ। यदि चंद्रमा नीच, पीड़ित या पाप ग्रहों से प्रभावित हो, तभी मोती पहनने की सलाह दी जाती है। यदि चंद्रमा पहले से ही मजबूत स्थिति में हो, तो मोती पहनना अनावश्यक या कभी-कभी नुकसानदायक भी हो सकता है।
सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है मोती
यह एक आम भ्रांति है कि मोती हर व्यक्ति को शांति देता है। वास्तव में, मेष, वृश्चिक और सिंह लग्न या राशि के जातकों के लिए मोती कई बार अनुकूल नहीं माना जाता। विशेष रूप से जिन लोगों में पहले से ही भावुकता, चंचलता या मानसिक अस्थिरता अधिक हो, उनके लिए मोती बिना परामर्श के पहनना उचित नहीं है।
शुद्ध और प्राकृतिक मोती ही पहनें
बाजार में कृत्रिम और रासायनिक मोती आसानी से मिल जाते हैं, जिनका ज्योतिषीय प्रभाव नगण्य होता है। मोती हमेशा प्राकृतिक, बिना छेद वाले और दूधिया चमक वाला होना चाहिए। उसमें दरार, काले धब्बे या अत्यधिक पीला रंग नहीं होना चाहिए।
सही धातु और उंगली का चयन करें
मोती सामान्यतः चांदी में धारण किया जाता है। इसे दाहिने हाथ की कनिष्ठा (छोटी उंगली) में पहनना शुभ माना गया है। कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे बाएं हाथ में भी धारण किया जा सकता है, लेकिन यह निर्णय कुंडली देखकर ही किया जाना चाहिए।
धारण करने का सही दिन और समय
मोती धारण करने के लिए सोमवार का दिन सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसे शुक्ल पक्ष के सोमवार, सूर्योदय के बाद, चंद्र होरा या शुभ मुहूर्त में पहनना चाहिए। धारण से पहले मोती को कच्चे दूध, गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करना भी शुभ माना जाता है।
मंत्र जाप का महत्व
मोती धारण करते समय चंद्रमा के मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप कर मोती धारण करना शुभ फल देता है।
पहनने के बाद होने वाले संकेतों पर ध्यान दें
यदि मोती पहनने के बाद मानसिक अशांति, डर, अनिद्रा, अत्यधिक भावुकता या शारीरिक परेशानी बढ़ने लगे, तो तुरंत इसे उतार देना चाहिए। यह संकेत हो सकते हैं कि मोती आपके लिए अनुकूल नहीं है।
निष्कर्ष
मोती केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली ज्योतिषीय रत्न है। इसे धारण करने से पहले उचित ज्योतिषीय परामर्श, शुद्ध रत्न का चयन और सही विधि का पालन अत्यंत आवश्यक है। सही तरीके से और सही व्यक्ति द्वारा धारण किया गया मोती जीवन में मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास ला सकता है, जबकि बिना विचार के पहना गया मोती विपरीत परिणाम भी दे सकता है।













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