डेस्क: संसद के शीतकालीन सत्र के समापन के साथ ही सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह सत्र लोकतांत्रिक विमर्श से अधिक वैचारिक टकराव और संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान का मंच बन गया। पार्टी का कहना है कि सत्र की शुरुआत गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के कथित अपमान से हुई और समापन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अपमान के साथ हुआ, जबकि इस दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी निशाना बनाया गया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद संवाददाताओं से कहा कि यह शीतकालीन सत्र नहीं बल्कि “प्रदूषणकालीन सत्र” था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वायु प्रदूषण जैसे गंभीर जनस्वास्थ्य मुद्दे पर चर्चा से बचती रही और विपक्ष की बार-बार की मांगों के बावजूद इस विषय को सदन में स्थान नहीं दिया गया।
रमेश ने सरकार की विधायी प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में 14 विधेयक पेश किए जाने की जानकारी दी गई थी, जिनमें से दो केवल औपचारिक प्रकृति के थे। इसके बावजूद घोषित 12 में से पांच विधेयक सत्र के दौरान पेश ही नहीं किए गए, जो संसदीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने बताया कि ‘जी राम जी विधेयक’ सत्र के अंतिम दो दिनों में लाया गया। इस विधेयक पर लोकसभा में देर रात तक चर्चा हुई और इसे अगले दिन पारित किया गया, जबकि राज्यसभा में भी कई घंटों की बहस के बाद इसे मंजूरी दी गई। कांग्रेस का आरोप है कि इस विधेयक के जरिए सत्र का समापन महात्मा गांधी के विचारों के अपमान के साथ किया गया।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई चर्चा को लेकर भी कांग्रेस ने सत्ता पक्ष पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने कहा कि सत्ता पक्ष यह भूल गया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर ही वंदे मातरम् के दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस बहस के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू के योगदान को नजरअंदाज किया गया और उनके प्रति अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
कुल मिलाकर कांग्रेस ने इस सत्र को सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं और वैचारिक एजेंडे का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि जहां एक ओर महापुरुषों की विरासत पर सियासत हुई, वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण जैसे जमीनी और तात्कालिक मुद्दे सदन के बाहर ही रह गए।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
