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Home राज्य-शहर राजस्थान

सिर्फ ‘नीच’ कहने से SC/ST एक्ट लागू नहीं होता: राजस्थान हाईकोर्ट

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
February 8, 2026
in राजस्थान
Reading Time: 1 min read
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मृतक कर्मचारी की नाता विवाह से हुई पत्नी भी पेंशन की हकदार: हाईकोर्ट
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डेस्क: राजस्थान हाईकोर्ट ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के दायरे को स्पष्ट करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल ‘नीच’ जैसे सामान्य अपमानजनक शब्द कह देने से यह अधिनियम स्वतः लागू नहीं हो जाता। जस्टिस वीरेन्द्र कुमार ने अपने आदेश में साफ किया कि एससी/एसटी ऐक्ट तभी लगाया जा सकता है, जब यह सिद्ध हो कि अपमान जानबूझकर जाति के आधार पर किया गया हो और आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी थी।

क्या है पूरा मामला
यह प्रकरण वर्ष 2011 में आईआईटी जोधपुर से जुड़े एक विवाद से संबंधित है। उस दौरान सरकारी अधिकारी अतिक्रमण की जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। जांच के समय कुछ लोगों ने विरोध किया और कथित रूप से अधिकारियों को ‘नीच’ और ‘भिखारी’ जैसे शब्द कहे। इसके बाद अधिकारियों ने इसे जातिगत अपमान बताते हुए एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें आईपीसी की धाराओं के साथ एससी/एसटी ऐक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं।

आरोपियों की दलील
आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उन्हें अधिकारियों की जाति की कोई जानकारी नहीं थी और जिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वे किसी विशेष जाति का संकेत नहीं देते। साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि घटना के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, इसलिए इसे जाति-आधारित अपमान नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट का फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कथित रूप से कहे गए शब्द किसी विशेष जाति की ओर संकेत नहीं करते और न ही यह साबित होता है कि आरोपियों को अधिकारियों की जाति की जानकारी थी। कोर्ट ने दोहराया कि एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई के लिए जाति-आधारित अपमान का स्पष्ट और ठोस प्रमाण आवश्यक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकने और उनके साथ धक्का-मुक्की से जुड़ी आईपीसी की धाराएं बरकरार रहेंगी और इन्हीं आरोपों पर आगे कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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