डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर दोनों देशों के बीच चल रही परमाणु वार्ता विफल होती है तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अमेरिका की पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी अफेयर्स, सेलेस्टे ए. वॉलेंडर ने कहा कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य बेड़ा तैनात कर दिया है। यह तैनाती सिर्फ संदेश देने के लिए नहीं है, बल्कि संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी का संकेत है।
वॉलेंडर ने इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, “अमेरिका ने इलाके में जो एयरक्राफ्ट कैरियर्स भेजे हैं, वे पहले की तुलना में पूरी तरह अलग हैं। मौजूदा तैनाती दिखाती है कि अमेरिका सिर्फ ताकत नहीं दिखा रहा, बल्कि इमरजेंसी की तैयारी कर रहा है। ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत करने का तरीका खोजना होगा।”
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने परमाणु संचालित विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ को कैरिबियन सागर से हटाकर पश्चिम एशिया में तैनात करने का आदेश दिया है। यह पोत पहले से फारस की खाड़ी और अरब सागर में मौजूद ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ के साथ ईरान पर सैन्य और कूटनीतिक दबाव बढ़ाएगा। ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की ओर भी इशारा किया और कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो कार्रवाई करना आवश्यक होगी।
ईरान और अमेरिका की अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता मंगलवार को जिनेवा में दूसरे दौर में प्रवेश करेगी। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त रवांची ने कहा कि अमेरिका को अपनी गंभीरता साबित करनी होगी। रवांची ने यह भी कहा कि 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम को निष्क्रिय करने की पेशकश यह संकेत है कि ईरान समझौता करने के इच्छुक है।













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