डेस्क: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भोपाल में आयोजित किसान महाचौपाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तगड़े आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हाल ही में हुई ट्रेड डील किसानों के हितों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने दावा किया कि एपस्टीन फाइल्स और उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे आपराधिक मुकदमों के दबाव में प्रधानमंत्री ने यह समझौता मंजूरी दी।
मोदी पर राजनीतिक दबाव का आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई आम समझौता नहीं है, बल्कि दबाव में लिया गया फैसला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ‘कम्प्रोमाइज्ड’ हो चुके हैं और अमेरिका के दबाव में आकर भारत-अमेरिका ट्रेड डील को हरी झंडी दे दी।
पीएम मोदी को खुली चुनौती
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे इस ट्रेड डील को रद्द करें। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है और इसे ‘किसानों के दिल में तीर’ बताया।
ट्रेड डील के पीछे की राजनीति
राहुल गांधी ने कहा कि चार महीने तक रुकी हुई भारत-अमेरिका ट्रेड डील अचानक क्यों आगे बढ़ी, इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं:
- एपस्टीन फाइल्स का दबाव – राहुल गांधी ने दावा किया कि अमेरिका ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम जारी कर पीएम मोदी को धमकाया।
- अडानी पर अमेरिका में मुकदमा – उन्होंने कहा कि इस मामले का असली निशाना अडानी नहीं बल्कि पीएम मोदी हैं। राहुल गांधी ने कहा, “तीर अडानी की तरफ नहीं, सीधे मोदी की ओर है।”
कैबिनेट की सलाह के बिना फैसला
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की सलाह या चर्चा किए बिना अमेरिका के साथ समझौते को मंजूरी दी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया।
चीन सीमा विवाद में मोदी की गैरमौजूदगी
राहुल गांधी ने दावा किया कि चीन के टैंक भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन सरकार और प्रधानमंत्री ने सेना को अकेला छोड़ दिया। पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब के हवाले से राहुल ने कहा कि उस समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाए।













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