नई दिल्ली :देश के उच्चतम न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया में ‘नोटा’ (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प की प्रभावशीलता पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या ‘नोटा’ व्यवस्था लागू होने के बाद निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की गुणवत्ता में कोई वास्तविक सुधार हुआ है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई है कि सभी प्रकार के चुनावों में, यहां तक कि जहां केवल एक ही प्रत्याशी मैदान में हो, वहां भी ‘नोटा’ का विकल्प अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि ‘नोटा’ का उद्देश्य मतदाताओं को असहमति दर्ज करने का अवसर देना है, किंतु यह देखना आवश्यक है कि इसका चुनावी व्यवस्था और नेतृत्व की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में यदि ‘नोटा’ को सर्वाधिक मत भी मिल जाएं, तब भी उससे चुनाव परिणाम निरस्त नहीं होता और न ही ‘नोटा’ को विजेता घोषित किया जाता है।
न्यायालय ने मतदान प्रतिशत को लेकर भी चिंता व्यक्त की। पीठ ने कहा कि शहरी तथा शिक्षित वर्गों में मतदान की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत कम देखी जाती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं की भागीदारी कई बार अधिक रहती है। न्यायालय ने संकेत दिया कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए व्यापक जनसहभागिता आवश्यक है और मतदान को प्रोत्साहित करने के उपायों पर गंभीर विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित भारत के महान्यायवादी आर. वेंकटरमणि ने दलील दी कि मतदान का अधिकार संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत आता है और ‘नोटा’ से जुड़ा विषय नीतिगत निर्णय का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के विभिन्न विधिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विचार आवश्यक है।
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को निर्धारित की है।
पृष्ठभूमि
वर्ष 2013 में उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों में ‘नोटा’ विकल्प जोड़ा गया था, जिससे मतदाता सभी प्रत्याशियों के प्रति असंतोष व्यक्त कर सकें। हालांकि वर्तमान नियमों के अनुसार ‘नोटा’ को सर्वाधिक मत मिलने की स्थिति में भी चुनाव परिणाम पर उसका प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता।
न्यायालय की ताजा टिप्पणियों के बाद चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को लेकर एक बार फिर बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।













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