डेस्क : हाल ही में आयोजित BAFTA Awards के ‘इन मेमोरियम’ सत्र में दिवंगत भारतीय सुपरस्टार धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी गई। इस सम्मान से न केवल उनके परिवारजन भावुक हुए, बल्कि दुनिया भर में फैले उनके प्रशंसकों के लिए भी यह गर्व और संतोष का क्षण रहा। अब उनकी पत्नी और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने इस पर अपनी भावनाएँ साझा की हैं।
“उनकी उपस्थिति सीमाओं से परे थी”
‘वैरायटी इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, हेमा मालिनी ने कहा कि धर्मेंद्र का व्यक्तित्व सीमाओं से परे था। उन्होंने कहा,
“वह ऐसे कलाकार थे जिनकी उपस्थिति सरहदों से आगे तक महसूस की जाती थी। दुनिया के हर कोने में उनके प्रशंसक थे। विदेशों में भी लोग उन्हें घेर लेते थे। हमने साथ में बहुत अधिक यात्राएँ नहीं कीं, शूटिंग के अलावा हम कम ही समय साथ बिता पाते थे। इसलिए हम अक्सर साथ में फिल्में साइन कर लेते थे ताकि काम के बहाने ही सही, कुछ समय साथ गुजार सकें।”
“मैं हर मिनट उन्हें मिस करती हूँ”
हेमा ने भावुक होते हुए कहा,
“मैं उन्हें हर पल याद करती हूँ। कई बार खुद से पूछती हूँ—क्या वह सच में चले गए हैं? मैं उनसे दोबारा कब मिल पाऊँगी?”
साथ की यादगार फिल्में
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने हिंदी सिनेमा की कई सफल फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें सीता और गीता, शोले और ड्रीम गर्ल प्रमुख हैं।
अपनी पसंदीदा फिल्म के बारे में पूछे जाने पर हेमा ने कहा कि उन्हें चुपके चुपके बेहद प्रिय है। साथ ही ‘शोले’ उनके दिल के करीब है क्योंकि उसकी शूटिंग के दौरान दोनों ने साथ में काफी समय बिताया था। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने धर्मेंद्र की सभी फिल्में नहीं देखी हैं, लेकिन समय मिलने पर वह एक-एक कर उनकी फिल्मों को देखना चाहेंगी।
पहली मुलाकात से विवाह तक
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की पहली मुलाकात 1970 में हुई थी। साथ काम करते-करते दोनों के बीच निकटता बढ़ी और बाद में यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। धर्मेंद्र, जो पहले से प्रकाश कौर से विवाहित थे, ने वर्ष 1980 में हेमा मालिनी से विवाह किया।
भावुक श्रद्धांजलि
धर्मेंद्र का निधन पिछले वर्ष 24 नवंबर को हुआ था। उनके निधन के बाद हेमा मालिनी ने एक भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा था कि धर्मेंद्र उनके लिए केवल पति ही नहीं, बल्कि बेटियों ईशा और अहाना के स्नेही पिता, मित्र, मार्गदर्शक और हर परिस्थिति में साथ देने वाले साथी थे। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र ने उनके जीवन में जो स्थान बनाया था, वह कभी भरा नहीं जा सकेगा। इतने वर्षों के साथ के बाद अब वह केवल यादों के सहारे जीवन जी रही हैं।
धर्मेंद्र की विरासत और उनका स्नेह आज भी करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में जीवित है।













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