कोलकाता : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और दबाव‑मुक्त कराने के लिए चुनाव आयोग ने कई नए निर्णय और व्यवस्थाएँ लागू की हैं। उनका कहना था कि चुनाव में हिंसा, दबाव और भय की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्पक्षता से करेंगे।
आयोग ने मतगणना प्रक्रिया में भी बदलाव किए हैं। अब पोस्टल बैलट की गिनती को EVM की पहली दो गिनतियों से पहले पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, यदि EVM और फॉर्म‑17सी में कोई अंतर पाया जाता है, तो वीवीपैट स्लिप की गिनती भी होगी। हारने वाले उम्मीदवार अब सात दिनों के भीतर निर्धारित शुल्क देकर अपनी EVM की जांच करवा सकते हैं।
मतदाता सहभागिता बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने 100% वेबकास्टिंग लागू करने का निर्णय लिया है। नए मतदाताओं को प्रतीकात्मक रूप से मतदाता पहचान पत्र प्रदान किए गए हैं, जिससे लोकतंत्र की इस महती प्रक्रिया में हर योग्य नागरिक को शामिल किया जा सके।
ज्ञानेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी योग्य मतदाता को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग का यह कदम लोकतंत्र की रक्षा और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है।
वहीं, राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं ने दक्षिणेश्वर काली मंदिर परिसर के बाहर मतदाता सूची संशोधन को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें काले झंडे और विरोध बैनर दिखाए गए।
चुनाव आयोग के यह कड़े और पारदर्शी कदम यह संदेश देते हैं कि लोकतंत्र में सत्य और निष्पक्षता सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की दबाव‑तंत्र या भय की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

