नई दिल्ली: भारत सरकार मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच अपने फंसे वाणिज्यिक जहाज़ों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत भेजने पर गंभीरता से विचार कर रही है। विशेष रूप से यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय और अन्य देशों के जहाज़ों को सुरक्षित निकालने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
सरकार के उच्च स्तरीय सूत्रों के अनुसार, इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक में निर्देश दिए कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल–गैस मार्गों को किसी भी संकट से सुरक्षित रखा जाए। इसी रणनीति के तहत नौसेना को संकटमोचक की भूमिका निभाने का विकल्प देखा जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि भारतीय जहाज़ मालिकों ने नौसेना से सुरक्षा एस्कॉर्ट की मांग की है। इसके तहत युद्धपोतों को भेजकर फंसे जहाज़ों तक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
संकट की पृष्ठभूमि:
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई वाणिज्यिक जहाज़ फंसे हैं। इनमें लगभग 37 भारतीय झंडेवाले जहाज़ शामिल हैं, जिन पर करीब 10,000 करोड़ रुपये का माल है और 400 से अधिक नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केवल भारतीय संपत्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल–गैस मार्गों के सुरक्षित संचालन के लिए भी महत्वपूर्ण है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए भारत का लगभग 45% कच्चा तेल और 80% LPG आता है।
अन्य देशों की स्थिति:
पाकिस्तान ने पहले ही अपने युद्धपोतों को होर्मुज स्ट्रेट के पास तैनात कर दिया है और अपने माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी कर रहा है।
सरकार की नीति:
प्रधानमंत्री मोदी की बैठक में यह भी तय किया गया कि संकट के समय ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाई जाएगी और घरेलू उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव को कम करने के उपाय किए जाएंगे। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जलमार्गों पर जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही अंतिम निर्णय लेने की संभावना है।













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