तेहरान : ईरान ने अपनी नौसैनिक फ्रिगेट IRIS Dena के अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबाए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। इसे “भयानक अपराध” बताते हुए ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह घटना उनका लोग “न तो भूलेंगे और न ही कभी माफ करेंगे।” यह हमला 4 मार्च को श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर हुआ, जिसमें कई नौसैनिक शहीद हुए।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बाकई ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि यह हमला युद्ध अपराध है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, जिनेवा कन्वेंशन और संयुक्त राष्ट्र के आक्रामकता परिभाषा का उल्लंघन करता है। बाकई ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने राहत और बचाव कार्यों में बाधा डाली, जिससे मानवतावादी संकट और बढ़ गया।
घटना का पृष्ठभूमि
रिपोर्ट्स के अनुसार, IRIS Dena भारतीय नौसेना द्वारा भेजे गए आधिकारिक आमंत्रण पर संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के लिए जा रही थी, तभी इसे अमेरिकी पनडुब्बी ने तोप के हमले (टॉरपीडो) से निशाना बनाया। यह हमला अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में हुआ, जिससे समुद्री कानून और युद्ध नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
हताहत और बचाव प्रयास
हमले में कई क्रू मेंबर्स की जानें चली गईं। श्रीलंकाई अधिकारियों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया, जिसमें दर्जनों नाविकों को बचाया गया और शहीदों के शवों को बरामद किया गया। श्रीलंका ने ईरान को मानवीय सहायता देने और मृतकों को उनके देश भेजने में सहयोग करने का वचन दिया है।
क्षेत्रीय और कूटनीतिक प्रभाव
IRIS Dena के डूबने से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है। इस हमले ने भारतीय महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय नियमों की पालना पर चिंता बढ़ा दी है।
ईरान ने भारतीय नौसेना द्वारा पहले IRIS Lavan जहाज के लिए की गई मानवीय सहायता की सराहना की है।
ईरानी सरकार ने शहीदों के लिए न्याय की प्रतिबद्धता जताई और चेतावनी दी कि इस तरह के कृत्यों का अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा, जो क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।













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