डेस्क: सरकार ने उन बड़ी कंपनियों के लिए आईपीओ नियमों में ढील दी है, जो अब अपनी पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी में हैं। नए नियम विशेष रूप से Jio और NSE जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए लाभकारी हैं। आइए जानते हैं कि सरकार ने किन नियमों में बदलाव किया है।
नए नियम और बदलाव
- छोटी कंपनियां (1600 करोड़ रुपये तक का मार्केट कैप):
अब इन कंपनियों को IPO के बाद कम से कम 25 प्रतिशत पब्लिक होल्डिंग रखना होगा। इस वर्ग के लिए पहले के नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। - मध्यम कंपनियां (1600 करोड़ से 4000 करोड़ रुपये तक):
इन कंपनियों को IPO के दौरान पब्लिक के लिए 400 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर करने होंगे। - बड़ी कंपनियां (4000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये तक):
आईपीओ के समय इन्हें कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सेदारी पब्लिक को ऑफर करनी होगी। साथ ही, 25 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने के लिए इन्हें तीन साल का समय मिलेगा। - विशाल कंपनियां (50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक):
IPO के समय पब्लिक को 1000 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर किए जाएंगे। पब्लिक होल्डिंग 25 प्रतिशत तक पहुँचाने के लिए इन कंपनियों को 5 साल का समय मिलेगा। - अत्यंत बड़ी कंपनियां (1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये तक):
अब इन कंपनियों को IPO में पब्लिक को 6250 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर करने होंगे। इस प्रस्ताव के बाद पब्लिक होल्डिंग सिर्फ 2.75 प्रतिशत होगी। 25 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग तक पहुँचने के लिए इन्हें 5 साल का समय मिलेगा। - सुपर विशाल कंपनियां (5 लाख करोड़ रुपये से अधिक):
IPO के समय इन्हें पब्लिक को 15,000 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर करने होंगे। लिस्टिंग के समय पब्लिक होल्डिंग कम से कम 1 प्रतिशत रहेगी।
नोट: यह निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें।













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