डेस्क: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को, जबकि मतगणना और नतीजे चार मई को घोषित किए जाएंगे। 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए पहले चरण में 152 और दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होगा। पिछली बार राज्य में आठ चरणों में चुनाव हुए थे।
चुनाव के ऐलान के साथ ही राज्य में पहला ओपिनियन पोल भी सामने आ गया है। मैटराइज-IANS के सर्वेक्षण के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर जनता का भरोसा बरकरार है। हालांकि, सीटों की संख्या पिछली बार की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन इस बार भी सरकार टीएमसी की ही बनने की संभावना दिख रही है। पोल में टीएमसी को 155-170 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि भाजपा को 100-115 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, ओवैसी का एआईएमआईएम गठबंधन 5-6 सीटें जीत सकता है, जबकि कांग्रेस का खाता खुलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
वोट प्रतिशत की बात करें तो टीएमसी को 43-45 फीसदी वोट मिलने की संभावना है, जबकि भाजपा 41-43 फीसदी वोट के आसपास ही रह सकती है। अन्य दलों के खाते में 13-15 फीसदी वोट जा सकते हैं। पिछली बार टीएमसी को 48.5 फीसदी और भाजपा को 38.5 फीसदी वोट मिले थे। सीटों के लिहाज से टीएमसी ने बड़ी जीत हासिल की थी और 213 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा केवल 77 सीटों पर सिमट गई थी।
इस बार चुनाव में मुस्लिम वोटों के बंटने की संभावना है। टीएमसी से सस्पेंडेड विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शीदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने की घोषणा की है और इसके लिए उन्होंने ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ भी बनाई है। चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी का पंजीकरण मंजूर कर दिया है। इस बार राज्य में उनके प्रदर्शन पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पश्चिम बंगाल के चुनाव के साथ ही असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनावों की तारीखें भी घोषित की गई हैं। मतगणना और नतीजे चार मई को घोषित होंगे, जो अन्य तीन राज्यों और पुडुचेरी के चुनाव परिणामों के साथ आएंगे।
पश्चिम बंगाल में इस बार टीएमसी और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी, वहीं एआईएमआईएम की भूमिका और हुमायूं कबीर के प्रभाव से राज्य की राजनीतिक दिशा पर नया मोड़ आ सकता है।













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