डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब और अधिक भयावह तथा जटिल होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान के मशहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़े एक यात्री विमान को निशाना बनाए जाने की खबर ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, सोमवार को अमेरिका द्वारा किए गए हमले में महान एयरलाइन का एक विमान पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। बताया जा रहा है कि यह विमान मानवीय सहायता—जैसे दवाइयाँ और खाद्य सामग्री—लेने के लिए नई दिल्ली आने वाला था और इसके 1 अप्रैल को भारत पहुंचने की संभावना थी।
घटना ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया है, बल्कि मानवीय सहायता अभियानों की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ईरानी मीडिया का दावा है कि युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के यात्री और कार्गो विमानों को निशाना बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार तक इजरायली हमलों में ईरान के 16 से 17 विमान नष्ट किए जा चुके हैं। इन हमलों के बाद ईरान के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में असुरक्षा और भय का माहौल गहरा गया है।
वहीं, इजरायल की ओर से इन आरोपों का अलग ही पक्ष सामने रखा गया है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि जिन विमानों को निशाना बनाया गया, उनका संबंध ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से था। उनका आरोप है कि इन विमानों का उपयोग कुद्स फोर्स द्वारा हथियारों की आपूर्ति के लिए किया जाता था, साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध में भी इनका इस्तेमाल रूस की सहायता के लिए किया गया। हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों और कुछ स्वतंत्र रिपोर्टों में यह संकेत मिले हैं कि नष्ट किए गए विमान सामान्य यात्री विमान थे, जिससे इस पूरे मामले पर विवाद और गहरा गया है।
इस घटनाक्रम का प्रभाव भारत-ईरान संबंधों पर भी पड़ सकता है। गौरतलब है कि ईरान के लिए मानवीय सहायता भेजने में भारत की ओर से किसी भारतीय एयरलाइन का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि ईरान की महान एयर या एयर ईरान के विमान ही भारत आकर राहत सामग्री लेकर जाते हैं। इससे पहले 18 मार्च 2026 को भारत ने ईरान के लिए पहली सहायता खेप भेजी थी। नई दिल्ली ने इसे दोनों देशों के बीच मित्रता और प्राचीन सभ्यतागत संबंधों का प्रतीक बताया था।
मशहद एयरपोर्ट पर हुए इस हमले ने न केवल पश्चिम एशिया में युद्ध की गंभीरता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि अब यह संघर्ष मानवीय प्रयासों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। आने वाले दिनों में इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।













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