हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। प्रत्येक माह में यह व्रत दो बार, त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है।
भक्त सुबह से उपवास रखते हैं और संध्या समय यानी प्रदोष काल में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। शिव परिवार की विधिपूर्वक पूजा के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में की गई पूजा का विशेष महत्व होता है और इसका फल कई गुना अधिक मिलता है।
अप्रैल 2026 का पहला प्रदोष व्रत
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल 2026 को प्रदोष व्रत होगा। यह दिन बुधवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है।
पंडालीन पूजा मुहूर्त:
15 अप्रैल 2026 को शाम 6:56 बजे से रात 9:13 बजे तक प्रदोष पूजा का शुभ समय रहेगा। इस अवधि में पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है।
बुध प्रदोष व्रत का महत्व:
बुध प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ उपाय माना जाता है। इस दिन सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह व्रत जीवन के दुख, बाधाएं और परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा और पापों का नाश कर, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
अप्रैल 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत
इस माह का दूसरा प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026 को रहेगा। यह दिन मंगलवार है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत विशेष रूप से स्वास्थ्य, साहस और ऋण मुक्ति के लिए किया जाता है।
भौम प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त:
त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल को शाम 6:51 बजे से 29 अप्रैल को शाम 7:51 बजे तक रहेगी। इस दिन प्रदोष काल में पूजा का शुभ समय शाम 7 बजे से रात 9:14 बजे तक रहेगा।
व्रत का महत्व:
भौम प्रदोष व्रत करने से शारीरिक और मानसिक परेशानियाँ दूर होती हैं। इसके साथ ही ऋण से मुक्ति, भूमि-भवन संबंधी विवादों का समाधान और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
- सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
- दिनभर सात्विक भोजन या फलाहार ग्रहण करें।
- संध्या समय में शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, शहद और गंगाजल से करें।
- इसके बाद लाल फूल, धतूरा और बेलपत्र अर्पित करें।
- पूजा के दौरान शिव मंत्रों का जाप करें और अंत में दीपक जलाकर विधिपूर्वक आरती करें।
इस प्रकार विधिपूर्वक प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को शुभ फल प्रदान करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। विस्तृत जानकारी और व्यक्तिगत सलाह के लिए क्षेत्रीय धार्मिक विशेषज्ञ से संपर्क करें।













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