नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच हालिया युद्धविराम को लेकर भारत की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव को विराम देते हुए दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है। यह निर्णय ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद लिया गया। इसके तहत ईरान ने सैन्य गतिविधियों को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने पर सहमति जताई है।
इस कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान की मध्यस्थता को अहम माना जा रहा है, जिसने दोनों पक्षों के बीच संवाद की मेजबानी की।
कांग्रेस का हमला: ‘विदेश नीति पर बड़ा झटका’
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक रणनीति और शैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने तंज कसते हुए ‘स्वयंभू विश्वगुरु’ की अवधारणा को भी कटघरे में खड़ा किया।
रमेश ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की नीति अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है।
इजरायल और पश्चिम एशिया पर ‘चुप्पी’ का आरोप
कांग्रेस ने सरकार पर पश्चिम एशिया संकट के दौरान चुप्पी साधने का आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि गाजा और वेस्ट बैंक की स्थिति पर भारत की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे वैश्विक मंच पर देश की स्थिति कमजोर हुई है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भी उठे सवाल
जयराम रमेश ने 10 मई 2025 को अचानक रोके गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले की पारदर्शिता पर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, जबकि अमेरिकी नेतृत्व बार-बार इसका श्रेय लेता रहा है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने आगे की वार्ता के लिए इस्लामाबाद में बैठक का प्रस्ताव भी दिया है।
अमेरिकी विशेषज्ञ की अलग राय
अमेरिकी विश्लेषक जोनाथन शेंजर ने इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका को ‘असामान्य’ बताया है। उनका मानना है कि चीन के कर्ज में डूबे पाकिस्तान की इस सक्रियता के पीछे उसकी रणनीतिक मजबूरियां भी हो सकती हैं।
राजनीतिक बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की विदेश नीति, पाकिस्तान के साथ संबंधों और पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका को लेकर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक गूंजने की संभावना है।













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