डेस्क : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आज लिए गए फैसलों का ऐलान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने किया। समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन फिलहाल सस्ते नहीं होंगे और ईएमआई में कोई कमी नहीं आएगी।
जीडीपी और आर्थिक स्थिति पर गवर्नर का बयान
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर भारतीय आर्थिक परिदृश्य पर पड़ रहा है। हालांकि, हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रित है और केंद्रीय बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। इस साल के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9 प्रतिशत रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में जीडीपी 6.8%, दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी तिमाही में 7% और चौथी तिमाही में 7.2% रहने का अनुमान है।
भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी संभव
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं और महंगाई बढ़ी, तो आरबीआई भविष्य में ब्याज दर बढ़ाने पर विचार कर सकता है। फिलहाल, रिजर्व बैंक महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाएगा।
एमपीसी बैठक और लाइव प्रसारण
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की द्वि-मासिक बैठक 6 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक चली। नीति का फैसला 8 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे घोषित किया गया। इसके बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दोपहर 12:00 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जानकारी दी। उनका बयान आरबीआई के यूट्यूब चैनल पर लाइव देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
मुथूट फिनकॉर्प की मुख्य अर्थशास्त्री अपूर्व जावड़ेकर के अनुसार, जीडीपी वृद्धि में संभावित गिरावट और वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए रेपो रेट को स्थिर रखना उचित निर्णय है। फरवरी 2026 में महंगाई दर केवल 3.21% थी, इसलिए ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई जा सकती है।
उनका कहना है कि रेट में ठहराव से वास्तविक ब्याज दरें कम होंगी, जिससे पूंजीगत व्यय और खपत को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, आरबीआई रुपये को स्थिर करने के लिए रेपो रेट बढ़ाने का विकल्प फिलहाल इस्तेमाल नहीं करेगा।
यस बैंक की रिपोर्ट ‘इकोलॉग’ में कहा गया है कि ब्याज दरों में कटौती का दौर अब समाप्त हो चुका है। महंगाई बढ़ रही है, रुपये पर दबाव है और वैश्विक केंद्रीय बैंक सतर्क हैं। हालांकि, फिलहाल रेट बढ़ोतरी तुरंत नहीं होगी, क्योंकि भारत कम महंगाई और उच्च वृद्धि वाली स्थिति से इस दौर में प्रवेश कर रहा है। बैंक के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में भी महंगाई 4.5-4.8 प्रतिशत के बीच रहेगी।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
