जयपुर : आचार्य श्री महाश्रमण जी के 17वें आचार्य पदारोहण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आध्यात्मिकता, संयम और संत परंपरा की गूंज सुनाई दी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. सतीश जी पूनियां ने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों की तपोभूमि है और संतों-गुरुओं के आशीर्वाद से यह आज भी विश्व गुरु के पद पर प्रतिष्ठित है।
डॉ. पूनियां ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अपनी आध्यात्मिक शक्तियों के कारण विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री तुलसी जी और आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने विश्व को अहिंसा और शांति का संदेश दिया, जिसे आगे बढ़ाते हुए वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण जी हजारों किलोमीटर की अहिंसा यात्रा के माध्यम से समाज में सद्भाव और समरसता का वातावरण निर्मित कर रहे हैं।
उन्होंने गुरु को समाज का प्रकाश स्तंभ बताते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र को वास्तविक आध्यात्मिक शक्ति धर्मगुरुओं से ही प्राप्त होती है। डॉ. पूनियां ने स्वयं को आचार्य श्री तुलसी जी का शिष्य बताते हुए तेरापंथ धर्मसंघ से अपने गहरे संबंध को भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम में सान्निध्य प्रदान करते हुए मुनि श्री तत्वरुचि जी “तरुण” ने कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण जी निष्काम योगी, स्थितप्रज्ञ, सूक्ष्मदर्शी, निर्मल प्रज्ञा संपन्न और कठोर परिश्रमी संत हैं। वे आत्मकल्याण के साथ-साथ परमार्थ और परोपकार के लिए निरंतर जागरूक रहते हैं।
मुनि श्री सुधाकर जी ने कहा कि महापुरुषों की स्तुति और भक्ति महान पुण्य का कारण होती है। जिस भूमि पर आचार्य श्री महाश्रमण जी जैसे संत अवतरित होते हैं, वह भूमि स्वयं धन्य हो जाती है। उन्होंने उनकी संयम साधना को अनुपम बताया।
मुनि श्री संभव कुमार जी ने मुक्तक प्रस्तुत किए, जबकि मुनि श्री नरेश कुमार जी ने भावपूर्ण गीत के माध्यम से गुरु के प्रति श्रद्धा अर्पित की।
इस अवसर पर तेरापंथ सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र बांठिया ने अपने विचार व्यक्त किए। श्री उम्मेद घोड़ावत ने मुख्य अतिथि का परिचय एवं स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सतीश पूनियां का श्री सुरेन्द्र सेखानी, श्री दलपत लोढ़ा, श्री विमल दुधोड़िया, श्री भंवर गोठी, श्री उम्मेद घोड़ावत, श्री मनीष मालू सहित अन्य गणमान्य जनों ने दुपट्टा ओढ़ाकर एवं साहित्य भेंट कर सम्मान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल की बहनों के मंगलाचरण से हुआ। महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के व्यवस्थापक श्री गौरव मंडोत ने समस्त व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।













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