डेस्क : देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश की आशंका ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की यह स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों, सब्जियों और अनाज की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
उत्तर भारत समेत कई राज्यों में तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। कई क्षेत्रों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। तेज गर्मी के कारण बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि लोग कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर का अधिक उपयोग कर रहे हैं। इससे ऊर्जा लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। यदि बारिश कम होती है तो खेती-किसानी पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सिंचाई पर निर्भर किसानों की लागत बढ़ेगी, वहीं फसल उत्पादन घटने से बाजार में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उत्पादन की स्थिति में सब्जियों, दालों, गेहूं, चावल और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। इससे खुदरा महंगाई दर में भी उछाल आने की आशंका है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पंप और अन्य संसाधनों पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है, जिससे कृषि लागत बढ़ेगी। इसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक महंगे दामों के रूप में पहुंचेगा।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि मौसम की दोहरी मार जारी रही तो आने वाले समय में घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है और मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।













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