नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को केंद्र सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष (सरप्लस) का हस्तांतरण, दरअसल सरकार की वित्तीय स्थिति को “उतनी मजबूत नहीं” दिखाता, जितना बताया जा रहा है।
जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरबीआई ने लगातार तीन वर्षों तक अपने आकस्मिक जोखिम बफर (कंटिन्जेंसी रिस्क बफर) को बढ़ाने के बाद इस वर्ष इसे घटाने का फैसला किया है, जिसके चलते केंद्र सरकार को बड़ा लाभ हुआ है।
उन्होंने कहा कि बफर में कटौती के कारण सरकार को लगभग 92 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त हुए हैं, जो उसे सामान्य स्थिति में नहीं मिलते। उनके अनुसार, यदि आरबीआई ने 2024-25 के स्तर पर ही जोखिम बफर बनाए रखा होता, तो केंद्र को इतनी बड़ी राशि का लाभ नहीं मिल पाता।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड केंद्र सरकार को देने की घोषणा की है, जो पिछले वर्ष के 2.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। केंद्रीय बैंक ने इस वर्ष 1,09,379.64 करोड़ रुपये को आकस्मिक जोखिम बफर के रूप में अलग रखा है, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 44,861.70 करोड़ रुपये थी। इसके साथ ही आरबीआई ने अपने कुल बैलेंस शीट आकार के 6.5 प्रतिशत स्तर पर इस बफर को बनाए रखने का निर्णय लिया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आरबीआई की गणना पद्धति और वित्तीय निर्णयों पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त प्रावधान के संबंध में उन्हें आरबीआई की गणनाओं पर पूरा विश्वास है और केंद्रीय बैंक ने जो डिविडेंड तय किया है, वह उसकी वित्तीय प्रक्रिया के अनुसार ही है।













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