डेस्क : प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया है कि जब वह दिल्ली आए थे, तब अंग्रेज़ी में सहज रूप से बात न कर पाने की वजह से कई लोगों ने उन्हें लेकर गलत धारणा बना ली थी।
अभिनेता के अनुसार, लोग अक्सर उनकी भाषा क्षमता के आधार पर यह मान लेते थे कि वह किसी गरीब या कम सुविधा वाली पृष्ठभूमि से आते हैं। इस अनुभव ने उनके जीवन के शुरुआती दिनों में एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।
पंकज त्रिपाठी ने एक हालिया बातचीत में कहा कि जब वह वर्ष 2001 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दाखिले के लिए दिल्ली आए, तब उन्हें एक गहरा “सांस्कृतिक झटका” लगा। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के कारण अंग्रेज़ी उनके लिए एक बड़ी बाधा थी और इसी वजह से उन्हें कई बार जज किया गया।
उन्होंने बताया कि कई लोग केवल भाषा के आधार पर किसी व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का अनुमान लगा लेते थे, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग होती है। उनके अनुसार, भाषा किसी की प्रतिभा या क्षमता का पैमाना नहीं हो सकती।
अभिनेता ने यह भी स्वीकार किया कि ऐसे अनुभव किसी भी व्यक्ति में हीन भावना पैदा कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने इस मानसिकता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उनका कहना है कि कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति के पास दो विकल्प होते हैं—या तो वह हीन भावना में चला जाए या फिर उससे ऊपर उठकर खुद को साबित करे।
पंकज त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हमेशा अपनी जड़ों पर भरोसा रखा और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, यही सोच उनके संघर्ष के दिनों में सबसे बड़ी ताकत बनी।
बिहार के गोपालगंज जिले से आने वाले पंकज त्रिपाठी आज भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी सादगी और सशक्त अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई है।













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