नई दिल्ली : देश में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच केंद्र सरकार इस विषय पर स्पष्टता लाने और विभिन्न राज्यों की आशंकाओं को दूर करने की दिशा में सक्रिय हो गई है। सरकार का कहना है कि परिसीमन के बाद किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व संतुलित बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सरकार परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को अधिक स्पष्ट रूप से सामने लाने की तैयारी कर रही है ताकि इस विषय पर फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सके। हाल के महीनों में विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों ने आशंका जताई है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
केंद्र सरकार का तर्क है कि प्रस्तावित व्यवस्था में लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि की जाएगी, जिससे किसी राज्य की मौजूदा हिस्सेदारी में उल्लेखनीय कमी नहीं आएगी। सरकार का दावा है कि सीटों की संख्या बढ़ने से सभी राज्यों को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलेगा और लोकतांत्रिक भागीदारी और मजबूत होगी।
परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है ताकि जनसंख्या के अनुपात में नागरिकों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके लिए परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है, जो नवीनतम उपलब्ध जनगणना के आधार पर अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन का प्रभाव केवल निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश की राजनीतिक संरचना और संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व को भी प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि इस विषय पर व्यापक चर्चा और सहमति बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि परिसीमन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने तथा सभी राज्यों और राजनीतिक दलों को विश्वास में लेने के लिए व्यापक संवाद किया जाएगा। आने वाले समय में इस विषय पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।













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