डेस्क : अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। तालिबान की नैतिकता पुलिस द्वारा महिलाओं के पहनावे और सार्वजनिक आचरण पर सख्ती किए जाने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में असंतोष देखने को मिल रहा है। महिलाओं को निर्धारित ड्रेस कोड का पालन न करने के आरोप में हिरासत में लिए जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी हेरात प्रांत में कई महिलाओं और युवतियों को कथित रूप से तालिबान द्वारा तय किए गए नियमों के उल्लंघन के आरोप में रोका गया और पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध की आवाजें उठी हैं तथा मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि महिलाओं की स्वतंत्र आवाजाही और व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। संगठन ने अफगान प्रशासन से मानवाधिकारों के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने की अपील की है।
विश्लेषकों का कहना है कि 2021 में सत्ता में वापसी के बाद से तालिबान महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर लगातार नए प्रतिबंध लागू करता रहा है। इन नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है, जबकि तालिबान का दावा है कि उसके कदम इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप हैं।
महिलाओं के अधिकारों को लेकर जारी यह विवाद अफगानिस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच संबंधों में एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।













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