जयपुर : राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच पुराने मतभेद चर्चा का विषय बन गए हैं। गहलोत के हालिया बयान के बाद भाजपा नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उन पर निशाना साधते हुए राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
अशोक गहलोत ने हाल ही में वर्ष 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा था कि उस समय सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के प्रयासों का कांग्रेस विधायकों के एक बड़े वर्ग ने विरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर 2022 का घटनाक्रम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि परिस्थितियों की देन था।
गहलोत के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत कटुता को लंबे समय तक बनाए रखना उचित नहीं है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता भविष्य की राजनीति देखना चाहती है, अतीत की नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत और पायलट के बीच वर्ष 2020 में शुरू हुआ नेतृत्व विवाद आज भी समय-समय पर चर्चा में आ जाता है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने कई बार दोनों नेताओं के बीच मतभेद समाप्त होने का दावा किया है, लेकिन हालिया बयानबाजी ने एक बार फिर इस मुद्दे को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।
उधर, सचिन पायलट की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनकी चुप्पी को विभिन्न अर्थों में देखा जा रहा है और आने वाले दिनों में उनकी प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
राजस्थान में आगामी राजनीतिक समीकरणों और कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी इस बयानबाजी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन से जुड़े मुद्दे भविष्य में भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।













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