डेस्क:इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की राजधानी में नाबालिग लड़कियों के लगातार लापता होने की घटनाओं पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। अदालत ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए लखनऊ पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर कड़ी चिंता जताई है और वरिष्ठ अधिकारियों को इस प्रकार के मामलों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
तीन दिनों में मांगी विस्तृत रिपोर्ट
जस्टिस वीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) को सख्त आदेश दिया है कि वे तीन दिनों के भीतर इस मामले में एक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके साथ ही, कोर्ट ने डीसीपी (पूर्वी) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी थाना प्रभारियों (एसएचओ), सर्किल अधिकारियों (सीओ) और संबंधित जांच अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
पुलिस कमिश्नर से मांगा स्पष्टीकरण
शहर के विभिन्न थानों में नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी से जुड़े मामलों में कोई ठोस कार्रवाई न होने पर हाई कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) से भी लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “नाबालिग लड़कियों के जीवन, सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस को अत्यधिक सतर्कता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए। इस प्रकार की लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” मामले की अगली अहम सुनवाई १० जून को तय की गई है।













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