डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने यौन हिंसा से जुड़े मामलों में एक ऐतिहासिक और व्यापक दिशा-निर्देश जारी करते हुए राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने रेप पीड़िताओं के बच्चों को कक्षा 12 तक मुफ्त शिक्षा देने और योग्य छात्रों को उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में किसी भी परिस्थिति में “टू-फिंगर टेस्ट” का उपयोग नहीं किया जाएगा। यह परीक्षण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, क्योंकि यह पीड़िताओं की गरिमा और अधिकारों का उल्लंघन करता है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं, जो यह सुनिश्चित करें कि रेप पीड़िताओं के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा समय पर उपलब्ध हो।
कोर्ट ने कहा कि इन बच्चों को समाज में समान अवसर मिले, इसके लिए सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसके साथ ही मेधावी छात्रों को IIT, NIT, AIIMS और IIM जैसे संस्थानों में चयन होने पर विशेष छात्रवृत्ति देने की भी व्यवस्था करने का आदेश दिया गया है।
यह फैसला न केवल कानूनी व्यवस्था में संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी एक मजबूत संदेश देता है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत