नई दिल्ली : भारत में व्यावसायिक यात्रा की मांग आने वाले एक वर्ष में मजबूत बनी रहने की संभावना है। एक ऑनलाइन यात्रा सेवा कंपनी एबिक्स ट्रैवल्स की रिपोर्ट के अनुसार, 74 प्रतिशत संगठन उम्मीद कर रहे हैं कि उनके व्यावसायिक यात्रा कार्यक्रमों में वृद्धि होगी। हालांकि, कंपनियाँ साथ ही लागत नियंत्रण और परिचालन दक्षता पर भी अधिक ध्यान दे रही हैं।
यह निष्कर्ष जून 2025 से मई 2026 के बीच कंपनी के कॉरपोरेट ग्राहकों के यात्रा पैटर्न और बुकिंग प्रवृत्तियों के विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियाँ विकास की महत्वाकांक्षाओं और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 74 प्रतिशत संगठन अगले 12 महीनों में व्यावसायिक यात्रा में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि 68 प्रतिशत ने यात्रा प्रबंधन में लागत अनुकूलन को अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताया है। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियाँ अब हर व्यावसायिक यात्रा से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने पर जोर दे रही हैं।
व्यावसायिक यात्रा को लेकर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह ग्राहक संबंधों को मजबूत करने, नए बाजारों में विस्तार, साझेदारी विकसित करने और राजस्व वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी प्रवृत्ति के चलते 52 प्रतिशत संगठनों ने प्रीमियम और व्यवसाय-आवश्यक यात्राओं में वृद्धि दर्ज की है।
इसके अलावा, 47 प्रतिशत संगठनों ने अंतिम समय पर की जाने वाली बुकिंग में बढ़ोतरी की बात कही है, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनियाँ बदलते बाजार अवसरों और परिचालन जरूरतों के अनुसार अधिक लचीलेपन के साथ यात्रा योजनाएँ बना रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कॉरपोरेट यात्रा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। 71 प्रतिशत प्रतिभागियों ने हवाई किरायों में उतार-चढ़ाव को एक प्रमुख चुनौती बताया है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए लगभग आधे संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों पर विचार कर रहे हैं।
लगभग 49 प्रतिशत संगठन यात्रा बुकिंग निर्णयों को बेहतर बनाने, खर्च को अनुकूलित करने और यात्रियों के अनुभव को सुधारने के लिए एआई-संचालित उपकरणों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ रही है। अब 58 प्रतिशत बुकिंग स्व-सेवा आधारित प्रणालियों के माध्यम से हो रही हैं, जिससे तेज अनुमोदन प्रक्रिया, अधिक सुविधा और निर्बाध डिजिटल अनुभव की मांग स्पष्ट होती है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यात्रा प्रबंधन में कई परिचालन चुनौतियाँ बनी हुई हैं। लगभग 63 प्रतिशत संगठनों ने यात्रा, खर्च, विदेशी मुद्रा और भुगतान प्रणालियों के आपस में न जुड़े होने को एक बड़ी समस्या बताया है। ऐसी विखंडित प्रणालियाँ पारदर्शिता की कमी, अनुपालन संबंधी समस्याएँ और प्रबंधन में अक्षमता पैदा करती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ये प्रवृत्तियाँ संकेत देती हैं कि भारत का कॉरपोरेट यात्रा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहाँ संगठन तकनीक और डेटा आधारित निर्णयों पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं। आने वाले समय में कंपनियाँ दक्षता बढ़ाने, लागत नियंत्रित करने और व्यावसायिक विकास को समर्थन देने के लिए डिजिटल उपकरणों, स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों में अधिक निवेश कर सकती हैं।













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