डेस्क : राजस्थान सरकार ने सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अधिकारियों और कर्मचारियों के निजी मोबाइल फोन के बिल सरकारी खाते से नहीं चुकाए जा सकते। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वित्त विभाग की जांच में यह सामने आया कि कुछ विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के निजी मोबाइल नंबरों के बिल सरकारी मद से भुगतान किए गए थे। इसे वित्तीय नियमों का उल्लंघन मानते हुए सरकार ने सभी विभागों से ऐसे मामलों का पूरा ब्यौरा मांगा है।
सरकार ने निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के निजी मोबाइल बिल सरकारी खाते से जमा किए गए हैं, उनसे भुगतान की गई राशि की वसूली की जाए। साथ ही विभागों को इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी विभाग ने नियमों की अनदेखी कर भुगतान किया है, तो संबंधित ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य सरकार हाल के महीनों में सरकारी खर्चों की लगातार समीक्षा कर रही है और विभिन्न विभागों में वित्तीय अनियमितताओं पर निगरानी बढ़ाई गई है। इसी क्रम में निजी मोबाइल बिलों के भुगतान का मामला भी जांच के दायरे में आया है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल स्वीकृत सरकारी कार्यों और निर्धारित नियमों के अनुसार ही होना चाहिए।
सरकार के इस आदेश के बाद विभिन्न विभागों में पुराने भुगतान अभिलेखों की जांच शुरू हो गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन अधिकारियों और कर्मचारियों के निजी मोबाइल बिल सरकारी खाते से चुकाए गए थे।













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