डेस्क : भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े आपराधिक मामले में अमेरिका की एक अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अभियोजन पक्ष को झटका दिया है। संघीय न्यायाधीश निकोलस जी. गाराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) से कहा है कि वह यह स्पष्ट करे कि उसने अडानी के खिलाफ दर्ज आपराधिक आरोपों को वापस लेने का निर्णय किन आधारों पर लिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल औपचारिक या संक्षिप्त बयान के आधार पर इतने गंभीर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश ने कहा कि सरकार की ओर से दी गई व्याख्या “बहुत ही संक्षिप्त और अस्पष्ट” है, जिससे अदालत यह तय नहीं कर सकती कि मामले को बंद करना उचित है या नहीं।
यह मामला वर्ष 2024 में दर्ज किया गया था, जिसमें अडानी और अन्य पर आरोप था कि उन्होंने कथित तौर पर भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के अनुबंध हासिल करने के लिए रिश्वत से जुड़े लेन-देन किए और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया। हालांकि अडानी समूह ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया था।
अमेरिकी न्याय विभाग ने पिछले महीने अदालत को सूचित किया था कि वह अब इस मामले में आगे अभियोजन नहीं चलाना चाहता। इसके बाद अडानी की ओर से केस को औपचारिक रूप से खारिज करने की याचिका दी गई थी।
लेकिन अदालत ने तत्काल फैसला देने से इनकार करते हुए कहा कि पहले सरकार को यह विस्तार से बताना होगा कि उसने केस वापस लेने का निर्णय क्यों और किस सार्वजनिक हित के आधार पर लिया। न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष को 13 जुलाई तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का समय दिया है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार निगाहें बनी हुई हैं। अदालत का यह रुख संकेत देता है कि मामला फिलहाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और अगली सुनवाई तक कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।













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