डेस्क : तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से मुख्यमंत्री बने सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) की सरकार शुरुआती दिनों से ही अपने तेज़ और कड़े फैसलों को लेकर चर्चा में है। सत्ता संभालने के बाद उनकी प्रशासनिक शैली को लेकर राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद विजय सरकार ने जनता से जुड़े कई बड़े वादों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए। इनमें घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा प्रमुख रही। हालांकि इस योजना पर कुछ शर्तें भी लागू की गई हैं, जिनके अनुसार इसका लाभ सीमित खपत वाले उपभोक्ताओं को ही मिलेगा।
सरकार ने सामाजिक और सार्वजनिक नीति के तहत नशा नियंत्रण को भी प्राथमिकता दी है। इसके तहत राज्य में नशा विरोधी विशेष इकाइयों के गठन और महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग से व्यवस्था करने की घोषणा की गई है।
सबसे चर्चित निर्णयों में एक बड़ा कदम राज्य की शराब नीति से जुड़ा रहा। सरकार ने मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों और बस अड्डों के 500 मीटर दायरे में स्थित 717 टीएएसमैक शराब दुकानों को बंद करने का आदेश दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन दुकानों को तय समयसीमा के भीतर बंद किया जाए। इस कदम को सामाजिक सुधार और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, हालिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार ने टीएएसमैक दुकानों से जुड़े बार लाइसेंसों पर भी सख्ती दिखाई है और सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन को लेकर कड़े नियम लागू करने के संकेत दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार की शुरुआती कार्यशैली—तेज़ निर्णय, कल्याणकारी योजनाओं पर जोर और सामाजिक अनुशासन से जुड़े कदम—एक नई शासन शैली की ओर संकेत करती है। वहीं समर्थकों का मानना है कि यह चुनावी वादों को तेजी से लागू करने की कोशिश है, जबकि आलोचक इसके आर्थिक और प्रशासनिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह सक्रिय और निर्णय-प्रधान शासन शैली आने वाले समय में किस तरह राज्य की प्रशासनिक दिशा तय करती है।













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