बीजिंग : चीन ने देशभर में नया ‘जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून’ लागू कर दिया है। चीनी सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी जातीय समुदायों के बीच राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और साझा चीनी पहचान को बढ़ावा देना है। हालांकि, इस कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी तेज हो गई है।
कानून के तहत सभी सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और निजी संस्थानों को जातीय एकता को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करना होगा। इसके साथ ही अल्पसंख्यक समुदायों को मुख्यधारा की चीनी संस्कृति और मंदारिन भाषा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
मानवाधिकार संगठनों और कई विशेषज्ञों का आरोप है कि यह कानून उइगर, तिब्बती, मंगोल और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान को कमजोर कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि “जातीय एकता” के नाम पर चीन समरसता के बजाय सांस्कृतिक समाकलन (Assimilation) की नीति को कानूनी रूप दे रहा है।
इस कानून का एक विवादित प्रावधान यह भी है कि यदि कोई विदेशी व्यक्ति या संगठन चीन की नजर में जातीय एकता को नुकसान पहुंचाने या अलगाववाद को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान को लेकर कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है।
हालांकि, चीन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नया कानून देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए बनाया गया है तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रथाओं के अनुरूप है।













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