स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व अनुभवी ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने क्रिकेट के भविष्य को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि आने वाले वर्षों में टी20 क्रिकेट का विस्तार लगातार होता रहेगा, जबकि एकदिवसीय (वनडे) क्रिकेट का भविष्य अनिश्चित दिखाई देता है। उनका मानना है कि बदलते समय के साथ दर्शकों की पसंद और क्रिकेट का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव वनडे प्रारूप पर पड़ सकता है।
अश्विन ने कहा कि टी20 क्रिकेट आज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया के नए देशों तक क्रिकेट को पहुंचाने का सबसे प्रभावी मंच बन चुका है। विभिन्न देशों में शुरू हो रही फ्रेंचाइजी लीगों ने खेल को नई पहचान दी है और युवा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के अवसर भी बढ़ाए हैं।
उन्होंने विशेष रूप से यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग (ईटीपीएल) जैसी प्रतियोगिताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी लीगें उन देशों में क्रिकेट के विकास को गति देंगी, जहां यह खेल अभी शुरुआती दौर में है। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर का अनुभव मिलेगा और क्रिकेट का वैश्विक दायरा और मजबूत होगा।
अश्विन ने कहा कि टी20 क्रिकेट आने वाले समय में और अधिक लोकप्रिय होगा तथा इसमें निवेश और दर्शकों की रुचि लगातार बढ़ती रहेगी। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उनके अनुसार, व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम, लगातार बढ़ती टी20 लीगों और बदलती दर्शक पसंद के कारण 50 ओवर के प्रारूप के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
पूर्व भारतीय स्पिनर का मानना है कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट खिलाड़ियों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे खिलाड़ियों को पूरे वर्ष प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी तकनीक, आत्मविश्वास और अनुभव में निरंतर वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि यदि क्रिकेट को नए देशों तक पहुंचाना है तो टी20 प्रारूप सबसे प्रभावी माध्यम साबित होगा।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से क्रिकेट जगत में वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर लगातार बहस चल रही है। टी20 लीगों की बढ़ती संख्या, खिलाड़ियों पर बढ़ता कार्यभार और दर्शकों की बदलती प्राथमिकताओं के बीच अश्विन का यह बयान इस चर्चा को नई दिशा दे सकता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कार्यक्रमों में टी20 और टेस्ट क्रिकेट की भूमिका और मजबूत हो सकती है, जबकि वनडे प्रारूप को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।













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