मुंबई:नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने शुक्रवार को जेट एयरवेज का स्वामित्व जालान कालरॅाक कंसोशिर्यम को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है। जेट एयरवेज को लेंडर्स का भुगतान सेटल करने के लिए 180 दिनों का समय दिया गया है। इससे पहले ट्रिब्यूनल ने कंसोशिर्यम को एयरलाइन के लेनदारों को भुगतान करने के लिए 16 नवंबर, 2022 तक का समय दिया था। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, प्रदीप नरहरि देशमुख और श्याम बाबू गौतम की दो सदस्यीय एनसीएलटी मुंबई पीठ ने कहा कि समाधान योजना की प्रभावी तिथि 16 नवंबर के रूप में ली गई है।
एनसीएलटी ने जालान कालरॅाक कंसोशिर्यम को क्रेडिटर्स के भुगतान के लिए 6 महीनों का समय भी दिया है। अब कंसोशिर्यम के पास इस साल मई के मध्य तक कर्मचारियों और कर्मचारियों सहित सभी लेनदारों को भुगतान करने का समय होगा। ऋणदाताओं के वकील रोहन राजाध्यक्ष ने आदेश पर दो सप्ताह की रोक लगाने की मांग की थी लेकिन न्यायाधिकरण ने याचिका खारिज कर दी थी।
जून 2021 में स्वीकृत संकल्प योजना के अनुसार, कंसोशिर्यम ने अब तक ऋणदाताओं के पास 150 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा की है। कंसोशिर्यम को वित्तीय लेनदारों को 185 करोड़ रुपये का नकद भुगतान भी करना है। विजेता बोलीदाता द्वारा हितधारकों को भुगतान के लिए 475 करोड़ रुपये सहित कुल 1,375 करोड़ रुपये का नकद निवेश प्रस्तावित किया गया है। शेष 900 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए डाले जाने हैं।
जेट एयरवेज के ऋणदाताओं ने स्वीकृत समाधान योजना के तहत 7,807.7 करोड़ रुपये से अधिक के अपने स्वीकृत दावों पर भारी कटौती की है। कंसोशिर्यम में संयुक्त अरब अमीरात स्थित अनिवासी भारतीय मुरारी लाल जालान शामिल हैं, जो अपनी व्यक्तिगत क्षमता में जेट एयरवेज में शेयर रखेंगे। इसके अलावा फ्लोरियन फ्रिट्च, जो अपनी निवेश होल्डिंग कंपनी कालरॉक कैपिटल पार्टनर्स के माध्यम से हिस्सेदारी के मालिक होंगे।













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