नोएडा:चीनी ठग ने अपने गिरोह के जरिये नौकरी-निवेश के नाम पर देशभर के युवाओं को जाल में फंसाया और तीन हजार करोड़ से ज्यादा रुपये की जालसाजी कर ली। सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस गिरोह के आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरोह ने फर्जीवाड़े के लिए फर्जी फर्म भी बना रखी थी।
सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाने में अलग-अलग राज्यों से फ्लिपकार्ट और अमेजन सहित अन्य कंपनियों में ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की शिकायत आई थी। बरेली निवासी युवती ने भी दो लाख 10 हजार रुपये ठगने की शिकायत दी थी। उत्तर प्रदेश साइबर अपराध एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर एक ठग को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। पुलिस पूछताछ में आरोपी की पहचान पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर निवासी मंजारुल इस्लाम के रूप में हुई है।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि मंजारुल ठगी करने वाले गिरोह का आरोपी है। गिरोह ने फर्जी लीगल कंसल्टेंसी फर्म खोल रखी थी। आरोपी हजारों की संख्या में लोगों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी का झांसा देते थे। फिर पीड़ति से नौकरी दिलाने के नाम पर कुछ पैसे अपने खाते में डलवा लेते थे। इसके बाद मोबाइल नंबर बंद कर लेते थे। इसी तरह आरोपी निवेश के नाम पर भी ठगी करते थे। आरोपी अपनी फर्जी कंपनी में निवेश कराकर अच्छा रिटर्न देने की बात कहकर लोगों से रुपये ऐंठते थे।
आरोपी ठगी के पैसे को क्रिप्टो करेंसी वॉलेट में ट्रांसफर करते थे ताकि पुलिस की पकड़ में न आ सकें। आरोपी अलग-अलग क्रिप्टो एक्सचेंज में वॉलेट बनाकर फर्जी कंपनियों, ट्रस्ट व एनजीओ के नाम से पैसा ट्रांसफर करते थे। ठग अभी तक 46 में 12 फर्जी कंपनियों, ट्रस्टों व फर्म के खातों में 1,500 करोड़ रुपये को ट्रांसफर कर चुके हैं। आरोपियों ने असम रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी नाम से फर्जी एनजीओ बनाकर भी 200 करोड़ रुपये ठगे थे। इसका आरोपी गुवाहाटी निवासी जयदेव डे पुणे जेल में बंद है।
इन वॉलेट में ट्रांसफर की गई रकम
ठगों ने होओबी के 95, बिनेंस के 64, ओकेक्स के 21, पोलोनिएक्स, स्मार्ट कांट, ओकेक्वाइनव, बिटपाई के दो-दो, बिटफिन्केस व एफटीएफ एक्सचेंज के किप्टो वॉलेट में ठगी के पैसे ट्रांसफर किए हैं। बिनेंस के 56 वॉलेट में करीब 1,413 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसमें छह वॉलेट भारत के और बाकी वॉलेट चीन, फिलीपींस, मलेशिया व अन्य देशों के हैं। पुलिस गिरोह के सरगना चीनी नागरिक की तलाश में है।
टैक्सी चालक से साठगांठ कर खोली कंपनी
साइबर क्राइम थाना प्रभारी रीता यादव ने बताया कि मंजारुल गुरुग्राम में टैक्सी चलाता था। लॉकडाउन से पहले उसकी मुलाकात चीनी नागरिक लियान से हुई। गिरोह के सरगना लिओन ने मंजारुल से कहा कि वह उसे प्रतिमाह 50 हजार रुपये और कमाई का हिस्सा देगा। इस पर मंजारुल लालच में आ गया। लियान ने मंजारुल व राहुल के नाम से एक कंपनी बनाई। इस कंपनी का बैंक खाता भी खोला गया। इस खाते का एक्सेस लियान ने अपने पास रख लिया। इसके बाद तीनों ने ठगी का धंधा शुरू कर दिया।
क्रिप्टो वॉलेट में भेजते थे जालसाजी का पैसा
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ठगी का पैसा क्रिप्टो वॉलेट में भेजते थे। गिरोह के क्रिप्टो वॉलेट चीन, मलेशिया, फिलिपिंस और वियतनाम से संचालित होते थे। आरोपियों द्वारा पार्ट टाइम नौकरी दिलाने और निवेश के एसएमएस और व्हाट्सएप मैसेज चीन में मौजूद सर्वर के जरिए भेजे जाते थे। ठगी की रकम को चीन से निकाला जाता था।
एक दिन में खाते में आए 14 करोड़ रुपये
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों की कंपनी के बैंक खाते में एक दिन में ठगी के 14 करोड़ रुपये आए थे। इस तरह गिरोह ने देशभर के हजारों लोगों से तीन हजार करोड़ से ज्यादा रुपये की ठगी की है। आरोपियों ने बरेली की युवती के खाते से यूपीआई के माध्यम से तीन अलग-अलग खाते में पैसे ट्रांसफर किए थे।
इन बातों का ध्यान रखें
1. किसी भी तरह के ऑफर के लालच में न आएं। अनजान व्यक्ति से फोन पर बात कर उसके बहकावे में न आएं
2. अच्छी तरह जांच करने के बाद ही किसी भी बैंक खाते में राशि डालें। किसी भी अनजान को खाते संबंधी जानकारी न दें
3. नौकरी संबंधी विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच कर लें। निवेश करने से पहले भी सावधानी बरतें।













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