गोरखपुर। गोरखपुर के गोड़धोइया नाला परियोजना क्षेत्र के मैत्रीपुरम में रहने वाले 10 परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। इन सभी के अधिग्रहीत मकान वापस होने की उम्मीद बढ़ गई है। शासन ने इस सम्बंध में जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजने के लिए कहना है।
इस क्षेत्र के लोगों ने जिस मकान को अपने खून-पसीने की कमाई से बनवाया आज उसी घर में पूरा परिवार बेगाना सा हो गया है। दरअसल, गोड़धोइया नाला प्रोजेक्ट की जद में कई मकान आ रहे थे। इस पर मुरारी ने सरकारी उलझनों में फंसने के बजाए घर की रजिस्ट्री कर मुआवजा लेना ही बेहतर समझा। आठ महीने पहले यहां के मुरारी श्रीवास्तव समेत 10 लोगों ने ने मकान रजिस्ट्री कर दी।
इसी बीच यहां मैत्रीपुरम संघर्ष समिति के कुछ सदस्यों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर मकान को टूटने से बचाने की गुहार लगाई। सीएम ने प्रशासन से दोबारा डिजायन बनाने को कहा। सीएम के निर्देश पर जल निगम ने दोबारा से डिजायन तैयार की तो मुरारी समेत 10 लोगों के घर का काफी कम हिस्सा नाले की जद में आया। यूं कह लें कि मकान को तोड़ने की स्थिति खत्म हो गई। अब जब मकान बच गया तो मुरारी समेत 10 लोगों ने जिला प्रशासन से मिल मुआवजा वापस लेकर रजिस्ट्री अपने पक्ष में करने की गुजारिश की।
जिला प्रशासन ऐसे आवेदन से असमंजस में पड़ गया है। प्रशासन को समझ नहीं आ रहा था कि इस मामले का कैसे निस्तारण करें। दरअसल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसमें मकान को वापस कर वितरित मुआवजा लेने की बात कही गई है। जिला प्रशासन ने शासन से इस सम्बंध में मार्गदर्शन मांगा। इस पर शासन ने मकान वापसी का प्रस्ताव बना कर भेजने को कहा है।
2015 में कर्ज लेकर बनवाया था घर
उमेश सिंह ने पत्नी मंजू सिंह के नाम पर मैत्रीपुरम पूर्वी के न्यू मॉडल कॉलोनी में एक-एक पाई जोड़कर 1990 में जमीन खरीदी थी। 2013 में बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी और मकान बनवाने की चिंता में उमेश सिंह और 2014 में पत्नी मंजू सिंह को हार्ट अटैक आया। 2015 में रिटायरमेंट के पैसे से मकान बनवाया। जब मकान टूटने की नौबत आई तो मन मसोस कर मुआवजा तो ले लिया लेकिन जब पता चला कि महज कुछ हिस्सा ही जाएगा तो उमेश भी प्रशासन से मुआवजा लेकर मकान लौटाने की गुहार लगा रहे हैं।













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