डेस्क: भारत ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होना चाहिए। नई दिल्ली ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की जल्द बहाली की उम्मीद जताई और तनाव कम करने के लिए संवाद व कूटनीति के महत्व पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी कहते रहे हैं, संघर्ष को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना, संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।”
जायसवाल ने यह भी कहा कि इस संघर्ष ने पहले ही आम लोगों को भारी पीड़ा पहुंचाई है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क प्रभावित हुए हैं। भारत को उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का निर्बाध आवागमन और वैश्विक वाणिज्य का प्रवाह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और एलएनजी परिवहन को सुचारू बनाए रखना आवश्यक है।
प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अन्य हितधारकों से लगातार संपर्क में है, जिसके परिणामस्वरूप कई भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा किसी प्रकार का शुल्क वसूलने पर भारत के साथ कोई चर्चा नहीं हो रही है।
ईरान में 7500 भारतीय नागरिक
जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ईरान में वर्तमान में लगभग 7500 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। नवीनतम सलाह के अनुसार, भारतीय नागरिकों से देश छोड़ने का आग्रह किया गया है। मंगलवार तक 1864 भारतीय (जिसमें 935 छात्र और 472 मछुआरे शामिल हैं) आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते ईरान से बाहर आ चुके हैं।
अमेरिका और ईरान की शर्तें
इस युद्धविराम पर प्रतिक्रिया अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनने के कुछ घंटों बाद आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर बमबारी और हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने को तैयार है, बशर्ते ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने के लिए सहमति दे। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि हमलों को रोका जाता है, तो ईरान की सशस्त्र सेनाएं अपने रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही ईरानी सैन्य पर्यवेक्षण के तहत ही होगी और दो सप्ताह की अवधि के दौरान सुरक्षित आवागमन संभव है।













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