डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि ईरान ने अमेरिका के सामने ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ पर चर्चा का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अमेरिका ने इस मुद्दे पर बातचीत से ही इनकार कर दिया। अरागची के अनुसार 26 फरवरी को जिनेवा में हुई वार्ता के दौरान उन्होंने परमाणु हथियारों को लेकर बातचीत की बात रखी, लेकिन अमेरिकी पक्ष इस विषय पर चर्चा करने को तैयार नहीं था और उसका रुख केवल युद्ध की ओर झुका हुआ दिखाई दिया।
ईरानी विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका से बातचीत के लिए जिनेवा गया था। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्टीव विटकॉफ कर रहे थे। दोनों देशों की तकनीकी टीमों के बीच 2 मार्च से विएना में एक और दौर की वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन इससे पहले ही दोनों देशों के बीच संघर्ष शुरू हो गया।
इसी बीच भारत ने भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर सक्रिय कूटनीतिक पहल की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की “गंभीर स्थिति” पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और असैन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर है और संकट के समाधान के लिए संवाद तथा कूटनीति को ही सबसे उचित रास्ता मानता है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति और क्षेत्र में हो रहे ताज़ा घटनाक्रमों से अवगत कराया। दोनों नेताओं ने आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।
इस बीच ईरान ने रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इसी मार्ग से भारत के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा आता है। दो दिन पहले भारत की ओर आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने उस समय गोलीबारी की, जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहा था।
गौरतलब है कि पिछले महीने संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ समन्वित हमले किए गए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबर सामने आई थी। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए। इन हमलों की चपेट में दुबई और दोहा जैसे वैश्विक व्यापार और विमानन केंद्र भी आए।
तनावपूर्ण हालात के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिनों ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इज़राइल और कतर के नेताओं से भी बातचीत की है। उन्होंने इन देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा करते हुए वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण पर भी चर्चा की।
खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। इनमें से करीब 10 हजार भारतीय ईरान में और 40 हजार से अधिक इज़राइल में निवास करते हैं।













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