डेस्क: ईरान के साथ बढ़ते युद्ध और लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने गुरुवार को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया। यह कदम वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और $100 प्रति बैरल से अधिक पहुंच चुकी कीमतों को स्थिर करने के उद्देश्य से लिया गया है।
अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा जारी किए गए नए ‘जनरल लाइसेंस’ के अनुसार यह छूट केवल 11 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। यह अनुमति केवल उन्हीं रूसी तेल cargो पर लागू होगी जो 12 मार्च की मध्यरात्रि से पहले जहाजों पर लोड किए जा चुके थे और वर्तमान में समुद्र में हैं। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि इस कदम से बाजार में करोड़ों बैरल कच्चा तेल उपलब्ध होगा, जिससे ईरान संकट के कारण बढ़ी कीमतों पर लगाम लगेगी।
यूक्रेन युद्ध के बाद लगाए गए थे प्रतिबंध
साल 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद अमेरिका और G7 देशों ने रूसी तेल पर कड़ा ‘प्राइस कैप’ और अन्य प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन मध्यपूर्व में जारी युद्ध ने अमेरिका को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। विशेषज्ञ इसे रूस को सजा देने के अमेरिकी प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देख रहे हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
तेल की कीमतों में हालिया उछाल का मुख्य कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावी रूप से बंद होना है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इस रणनीतिक मार्ग को अवरुद्ध करने के संकेत दिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। हॉर्मुज मार्ग बंद होने से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा बन गया है।
अल्पकालिक उपाय, रूस को लाभ नहीं
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यह केवल अल्पकालिक कदम है। उन्होंने कहा, “यह छूट केवल ट्रांजिट में फंसे तेल पर लागू होती है और इससे रूसी सरकार को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं होगा। राष्ट्रपति ट्रंप वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बढ़ाने और कीमतों को कम रखने के लिए यह निर्णायक कार्रवाई कर रहे हैं।”
सुरक्षा के लिए अमेरिकी नौसेना तैयार नहीं
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नौसेना अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। उन्होंने बताया, “अभी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को एस्कॉर्ट करने में समय लगेगा, इसलिए वैकल्पिक रूप से समुद्र में फंसे रूसी तेल की आपूर्ति को मंजूरी दी गई है।”
वैश्विक राहत
अमेरिका के इस फैसले से भारत और चीन जैसे देश बड़ी राहत महसूस कर सकते हैं, क्योंकि वे अब समुद्र में फंसे रूसी कार्गो को कानूनी जोखिम के बिना खरीद सकते हैं। हालांकि, यह देखना बाकी है कि क्या केवल 11 अप्रैल तक की यह अस्थायी छूट वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मंदी से बचा पाएगी या नहीं।













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