डेस्क : अभिनेत्री भाग्यश्री ने आधुनिक फिल्मों में दिखाए जा रहे अनावश्यक इंटीमेट सीन (अंतरंग दृश्यों) को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी है। उन्होंने कहा कि कहानियाँ बिना इन दृश्यों के भी बोल्ड, दिलचस्प और समाज‑अनुकूल ढंग से पेश की जा सकती हैं।
भाग्यश्री ने हाल ही में दिए इंटरव्यू में बताया कि 90 के दशक में सिनेमा परिवार के लिए मनोरंजन का साधन था। “उस समय लोग माता‑पिता और बच्चों के साथ बैठकर फिल्म देखते थे। लेकिन अब फिल्मों के विकल्प बढ़ जाने और दर्शकों की प्राथमिकताएँ अलग होने के कारण ऐसा करना मुश्किल हो गया है। फिल्मों में रियलिज़्म दिखाना जरूरी है, लेकिन दर्शक को असहज करने वाले इंटीमेट सीन दिखाना आवश्यक नहीं है,” उन्होंने कहा।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि पहले के दौर में महिलाओं के करियर पर शादी का असर अधिक पड़ता था। लेकिन आज ज्यादा शिक्षित महिलाएँ और सहयोगी पुरुष कलाकारों को उनके करियर में समर्थन देते हैं, जिससे उनके विकल्प बढ़ गए हैं।
वर्क फ्रंट की बात करें तो भाग्यश्री ने बॉलीवुड में अपनी पहचान फिल्म “मैंने प्यार किया” (1989) से बनाई थी। इसके बाद उन्होंने कुछ समय फिल्मों से दूरी बनाई। अब वह रितेश देशमुख की आगामी फिल्म “राजा शिवाजी” में नजर आएंगी, जो 1 मई को रिलीज़ होने वाली है।
भाग्यश्री की यह टिप्पणी उन फिल्मों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें बोल्डनेस केवल अंतरंग दृश्यों तक सीमित रह जाती है। उनका मानना है कि कहानी और अभिनय के माध्यम से भी दर्शकों को जोड़ा जा सकता है, बिना किसी असहजता के।













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