तेल अवीव : इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी इज़राइल दौरे को ‘ऐतिहासिक’ बताया है। उन्होंने कहा कि भारत और इज़राइल के बीच नवाचार, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है।
रविवार को कैबिनेट बैठक की शुरुआत में नेतन्याहू ने कहा कि वह इस बुधवार अपने “प्रिय मित्र” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को दो वैश्विक नेताओं के बीच सशक्त और दूरदर्शी गठबंधन बताया।
नेतन्याहू ने कहा, “हम नवाचार, सुरक्षा और साझा रणनीतिक दृष्टि में भागीदार हैं। मिलकर हम स्थिरता और प्रगति के लिए प्रतिबद्ध देशों का एक मजबूत समूह बना रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर क्षेत्रीय सहयोग तक, द्विपक्षीय संबंध लगातार नए आयाम प्राप्त कर रहे हैं।
केनेसट में भाषण, यद वशेम का दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के दौरान इज़राइल की संसद केनेसट को संबोधित करेंगे। इसके अतिरिक्त यरुशलम में एक नवाचार कार्यक्रम में भाग लेंगे तथा होलोकॉस्ट स्मारक यद वशेम का दौरा भी करेंगे।
नेतन्याहू ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इज़राइल के रिश्तों का ताना-बाना और अधिक मजबूत हुआ है। उन्होंने स्मरण कराया कि वह स्वयं भारत की यात्रा कर चुके हैं और वर्ष २०१७ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल पहुंचे थे। तब वे इज़राइल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। यह उनका दूसरा इज़राइल दौरा होगा।
उच्च प्रौद्योगिकी पर विशेष जोर
इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के दौरान उच्च प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और सशक्त बनाने पर चर्चा होगी। उनके अनुसार ये तकनीकें केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की भी आवश्यकता हैं और दोनों देश इन क्षेत्रों में अग्रणी बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।
क्षेत्रीय सहयोग की नई रूपरेखा
नेतन्याहू ने एक व्यापक क्षेत्रीय सहयोग की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उनके अनुसार भारत, अरब देश, अफ्रीकी राष्ट्र, भूमध्यसागरीय क्षेत्र के देश तथा एशिया के अन्य देशों के साथ मिलकर एक ऐसा तंत्र विकसित किया जा सकता है, जो क्षेत्रीय चुनौतियों के विरुद्ध साझा दृष्टिकोण के साथ कार्य करे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब १९ फरवरी को आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक के बाद क्षेत्रीय कूटनीति पर नई चर्चा तेज हुई है। यह पहल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा युद्धविराम योजना से प्रेरित मानी जाती है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा भारत-इज़राइल संबंधों को आर्थिक, कूटनीतिक और सुरक्षा सहयोग के नए आयाम दे सकती है।













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