नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर के कुछ महीनों बाद भारतीय रक्षा गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुए इस अभियान ने भारत-पाकिस्तान के बीच हवाई शक्ति संतुलन और स्टील्थ क्षमता के महत्व को रेखांकित किया था। अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारतीय वायु सेना अपनी मारक क्षमता को अगले स्तर पर ले जाने के लिए रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Sukhoi Su-57 की खरीद पर गंभीरता से विचार कर रही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो वायु सेना शुरुआती चरण में 36 से 40 विमानों का ऑर्डर दे सकती है। इसे चीन के J-20 जैसे स्टील्थ जेट और पाकिस्तान को संभावित रूप से मिलने वाले उन्नत लड़ाकू विमानों के मद्देनज़र एक ‘ब्रिज क्षमता’ के रूप में देखा जा रहा है। भारत का स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम 2035 के आसपास सेवा में आने की संभावना है, ऐसे में अंतरिम अवधि के लिए यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बदलते हवाई युद्ध की दिशा
आधुनिक हवाई युद्ध में अब केवल मारक क्षमता ही नहीं, बल्कि दुश्मन की नजरों से बचने और पहले पहचानने की क्षमता निर्णायक बन चुकी है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान उन्नत स्टील्थ तकनीक से लैस होते हैं, जिनका एयरफ्रेम रडार तरंगों को कम परावर्तित करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है। रडार-अवशोषक सामग्री, आंतरिक हथियार भंडारण, उन्नत सेंसर फ्यूजन और सुपरक्रूज जैसी क्षमताएं इन्हें पारंपरिक लड़ाकू विमानों से अलग बनाती हैं।
Su-57 की प्रमुख विशेषताएं
निर्माता कंपनी के अनुसार, Su-57 पूरी तरह नए और एकीकृत एवियोनिक्स सिस्टम से लैस है, जिसमें युद्ध संचालन और पायलट सहायता के लिए उच्च स्तर का स्वचालन शामिल है। इसका ऑन-बोर्ड सिस्टम विमान को स्वतंत्र रूप से मिशन संचालित करने के साथ-साथ जमीनी नियंत्रण और अन्य विमानों के साथ वास्तविक समय में डेटा साझा करने में सक्षम बनाता है।
यह जेट हवा से हवा और हवा से सतह पर मार करने वाले विविध हथियारों का उपयोग कर सकता है, जिससे यह बहु-भूमिका (मल्टी-रोल) क्षमता रखता है। रडार, इन्फ्रारेड और दृश्य तरंगदैर्ध्य में कम दृश्यता इसे गुप्त अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है।
इसके अतिरिक्त, इसकी सहायक विद्युत इकाई उच्च तैनाती स्वायत्तता प्रदान करती है और जमीनी परीक्षण के दौरान ईंधन की खपत कम रखती है। विमान में ऑक्सीजन निष्कर्षण इकाई तथा विस्फोट-रोधी ईंधन टैंक प्रणाली भी दी गई है, जो इसकी परिचालन क्षमता और सुरक्षा स्तर को बढ़ाती है।
रणनीतिक संकेत
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा साकार होता है तो भारतीय वायु सेना को पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ क्षमता का महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। साथ ही, यह कदम क्षेत्रीय सामरिक संतुलन बनाए रखने और भविष्य के संभावित संघर्षों में बढ़त सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय साबित हो सकता है।













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