डेस्क: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से पुलिस ने पाकिस्तान के लिए कथित तौर पर जासूसी करने वाले एक संदिग्ध नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग देश के सैन्य ठिकानों और संवेदनशील स्थानों के वीडियो बनाकर पाकिस्तान के अलावा यूनाइटेड किंगडम और मलेशिया के नंबरों पर भी भेज रहे थे।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन से दिल्ली स्थित भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कार्यालयों सहित कई संवेदनशील स्थानों के 50 से अधिक वीडियो बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इन वीडियो और लोकेशन की जानकारी विदेशी नंबरों पर भेजी जाती थी।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क को पाकिस्तान में बैठा एक हैंडलर संचालित कर रहा था, जिसे आरोपी ‘सरदार’ नाम से संबोधित करते थे। पुलिस के मुताबिक ‘सरदार’ अलग-अलग स्थानों के नाम बताकर वहां के वीडियो और लोकेशन मंगाता था और इसके बदले आरोपियों को आठ हजार रुपये तक का भुगतान करता था।
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि ‘सरदार’ के निर्देश पर दिल्ली में दो स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरे लगाए गए थे, जिनके जरिए सीधे निगरानी की जा रही थी। पुलिस ने इनमें से एक कैमरा बरामद कर लिया है, जबकि दूसरे कैमरे की जांच अभी जारी है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेरठ के परतापुर निवासी सुहेल मलिक उर्फ रोमियो, संभल के ज्ञानपर सिसौना गांव की साने इरम उर्फ महक और गाजियाबाद के भोवापुर निवासी प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार सुहेल इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। वह कथित तौर पर काम पूरा करने वालों को भुगतान करता था। हालांकि वह अपने बैंक खाते या यूपीआई का इस्तेमाल नहीं करता था, बल्कि परिचितों या दोस्तों के खातों से पैसे ट्रांसफर करवाकर उन्हें नकद रकम दे देता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि सुहेल ने राज वाल्मीकि को इस नेटवर्क से जोड़ा था और उसे दिल्ली में कैमरे लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। सूत्रों के अनुसार राज ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और आर्मी कैंट क्षेत्र के पास कैमरा लगाया था और उसका एक्सेस एक विदेशी व्यक्ति को दिया था। हालांकि पुलिस ने एक कैमरा बरामद किया है, लेकिन अधिकारी अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब राज वाल्मीकि की गतिविधियों पर लोगों को शक हुआ। बताया जा रहा है कि उसने कुछ समय पहले अपना फूड स्टॉल बंद कर दिया था और नया आईफोन खरीद लिया था, जिससे आसपास के लोगों में चर्चा होने लगी। बाद में पुलिस को उसके और उसके साथियों द्वारा संवेदनशील स्थानों के वीडियो बनाए जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
शुरुआत में राज ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
इंदिरापुरम के सहायक पुलिस आयुक्त अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जिन खातों से रकम ट्रांसफर हुई है, उन सभी खाताधारकों की भी जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ करेगी।













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