नई दिल्ली : भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक पहल है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते से हार्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षित रहेगा, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत लंबे समय से संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवाद सुलझाने पर जोर देता रहा है।
समझौते की पृष्ठभूमि
अमेरिका और ईरान के बीच हाल के सप्ताहों में तनाव बढ़ा हुआ था। मिसाइल हमले, ड्रोन गतिविधियां और सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था।
समझौते के अनुसार दोनों देशों ने तुरंत प्रभाव से दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई है। इस दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को आगामी वार्ता के लिए इस्लामाबाद बुलाया गया है।
भारत की प्राथमिकताएँ
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह युद्धविराम:
- पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ाने में मदद करेगा
- वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करेगा
- कूटनीति और वार्ता को बढ़ावा देगा
साथ ही, ईरान में भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा और सतर्कता की सलाह जारी की गई है।













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