नई दिल्ली: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवाद सुलझाने और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने का आग्रह किया है।
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों से बेहद चिंतित है। हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे तनाव को बढ़ाने से बचें और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। विवादों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लिया जाना चाहिए। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।”
बयान में यह भी कहा गया कि क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशन नागरिकों के संपर्क में हैं और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सभी नागरिकों से एम्बेसी के संपर्क में रहने और स्थानीय दिशा-निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया गया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल 12 दिनों के युद्ध के बाद इजरायल और अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमला किया। ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को निशाना बनाने वाले हमले में तेहरान में कई लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई है। ईरानी मीडिया ने बताया कि एक प्रोजेक्टाइल एक लड़कियों के स्कूल में लगा, जिससे इमारत को भारी नुकसान हुआ और लगभग 53 लड़कियों की मौत हुई। ईरानी विदेश मंत्री ने इस हमले का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ने का आश्वासन दिया।
इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और अमेरिका के मध्य-पूर्व ठिकानों तथा इजरायल के करीब 100 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके चलते इजरायल में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन ने नागरिकों को शेल्टर्स में जाने का आदेश दिया।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ने अब वह मदद भेजी है जिसका ईरानवासियों को वर्षों से इंतजार था। उन्होंने कहा कि इस हमले का उद्देश्य ईरानी सत्ता का परिवर्तन और न्यूक्लियर हथियार रखने से रोकना है।













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