डेस्क : देश को तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी स्थिति दिलाने के लिए भारतीय उद्योग जगत को अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में निवेश को तेज़ी से बढ़ाना होगा। सरकार के वरिष्ठ अधिकारी राजीव गौबा ने कहा है कि भारत को अब तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका सृजनकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था नवाचार और उच्च तकनीक पर आधारित हो चुकी है। ऐसे में केवल सेवाओं या आयातित तकनीक पर निर्भर रहना दीर्घकालिक विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। भारतीय उद्योगों को अपनी अनुसंधान क्षमता को मजबूत करना होगा ताकि देश नई तकनीकों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सके।
राजीव गौबा ने इस बात पर भी जोर दिया कि विकसित देशों की बड़ी कंपनियां अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अनुसंधान एवं नवाचार पर खर्च करती हैं, जबकि भारत में यह अनुपात अभी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित होना है तो निजी क्षेत्र, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत पहले ही सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में मजबूत स्थिति हासिल कर चुका है, लेकिन अब अगला चरण गहन तकनीक (डीप टेक), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण का है। इसके लिए मजबूत अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय उद्योग नवाचार और अनुसंधान में अधिक निवेश करते हैं, तो भारत वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख निर्माता देश के रूप में उभर सकता है।
सरकारी स्तर पर यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि आने वाले समय में भारत का विकास मॉडल केवल उपभोग आधारित नहीं, बल्कि नवाचार आधारित होना चाहिए, जिससे देश को तकनीकी क्षेत्र में दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।













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